Warning: include(domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address [email protected].

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > साहित्य > साहित्य का इतिहास > अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar Shahid Sardar Bhagat Singh
Subscribe to our newsletter and discounts
अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar Shahid Sardar Bhagat Singh
Pages from the book
अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar Shahid Sardar Bhagat Singh
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के विषय में

अमर शहीद सरदार भगत सिंह मात्र एक जीवनी परक पुस्तक नहीं, स्वाधीनता संग्राम और मातृभूमि प्रेम का जीवंत आख्यान है । 23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास मे ब्रिटिश राज की बर्बरता का ज्वलंत उदाहरण है । इस दिन सरदार भगत सिह और उनके दो अन्य साथियों सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर चढ़ा दिया गया था । समय बीतने के साथ-साथ आज भी यह मृत्यु अतीत नहीं हुई है । आज भी यह दिन भारतीयों के लिए शहादत दिवस है । प्रस्तुत पुस्तक को सरदार भगत सिंह की जीवनी न कहकर उनकी संघर्ष कथा कहना ज्यादा बेहतर होगा । सन् 1931 में जब यह पुस्तक पहली बार अंग्रेजी में लिखी गई तो ब्रिटिश सरकार ने इसे जब्त कर लिया । उसी को आधार बनाकर इसे फिर से विस्तारपूर्वक लिखा गया और हिन्दी में पहली बार 1947 में कर्मयोगी प्रेस से इसका प्रकाशन हुआ ।

ब्रिटिश सरकार द्वारा पुस्तक जब्त करने की कलुषित मनोवृत्ति के विवरण से लेकर भगत सिंह के जीवन की तमाम महत्वपूर्ण घटनाओं, उनकी गतिविधियों, उनके संघर्षों की दास्तान तथा उनके सहकर्मियों के बलिदानों को जितने तथ्यपूर्ण ढंग से जितेन्द्रनाथ सान्याल ने इस पुस्तक में रखा है, अन्यत्र कहीं मिलना दुर्लभ है । लेखक सरदार भगत सिंह के आत्मीय मित्र थे । अपने देश और देश के इतिहास से भली भांति परिचित होने के लिए आम हिन्दी पाठकों के लिए यह एक प्रेरणादायक संग्रहणीय पुस्तक है ।

भूमिका

सरदार भगत सिंह के पार्थिव शरीर का नाश हुए 16 वर्ष से अधिक हो गए । आज. भी उनका चित्र नगरों और ग्रामों के घरों और दूकानों में, कहीं अकेला और कहीं देश के दो-चार ऐतिहासिक पुरुषों या देवताओं के चित्रों के साथ, लगा दिखाई देता हे । उनका नाम देश के कोने-कोने में फैला है और श्रद्धा से स्मरण किया जाता है । उनके बलिदान ने उनके नाम को देश की प्रिय-वस्तु बना दिया है ।

आज जब भांरतवर्ष में ब्रिटिश-शासन की समाप्ति के अंतिम दृश्य हम देख रहे हैं, हमें भगत सिंह की बरबस याद आती है । हम भूल नहीं सकते कि उस शासन की जडों को अपने क्रांतिकारी कामों और आत्म-समर्पण से भगत सिंह ने गहरा धक्का दिया था और जनता के हृदय में उसके उखाड़ फेंकने की तीव्र भावना भर दी थी ।

भगत सिंह युवावस्था में चले गए, उनकी भावनाओं की कुछ कल्पना उनके कामों और अदालत में दिए गए उनके बयानों से हम कर सकते हैं । मुझको याद है कि केंद्रीय असेंबली में बम. फेंकने के अभियोग के उत्तर में जो बयान उन्होंने अदालत में दिया था, उसका कितना गहरा प्रभाव मेरे हृदय पर पड़ा था ।

इस पुस्तक में भगत सिंह के जीवन की कड़ियों को लड़ी में बांधने का यत्न है । कई वर्ष हुए, श्री जितेन्द्रनाथ सान्याल ने अंग्रेजी में एक पुस्तक 'सरदार भगत सिंह' के शीर्षक से लिखी थी । उस पुस्तक का प्रकाशन गवर्नमेंट की आज्ञा से रोका गया था । कुछ महीने हुए हमारे प्रांत की गवर्नमेंट ने उस रोक को हटाया है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री रामरख सिंह सहगल की चिरंजीविनी, कुमारी स्नेहलता सहगल ने उसी पुस्तक के आधार पर यह पुस्तक लिखी है, 'किंतु इस पुस्तक में परिशिष्ट के रूप में सरदार भगत सिंह के संबंध में अधिक सामग्री दी गई है । हमारे देश के एक विशिष्ट पुरुष और उसके साथियों का विवरण होने के कारण यह पुस्तक देश के राजनीतिक इतिहास के अध्ययन में हिंदी-प्रेमियों के लिए सहायक होगी । मैं इसका स्वागत करता हूं ।

आज की स्थिति में यह पुस्तक सामयिक है। भगत सिंह और उनके साथियों का विश्वास देशवैरियों की हिंसा के पक्ष में था । इस समय यह प्रश्न एक दूसरी पृष्ठभूमि में हमारे सामने है। हिंसा अथवा अहिंसा-हमारे देश का पुराना दार्शनिक- प्रश्न है। हममें से हर एक के जीवन का रूप इस बात पर निर्भर करता है, कि वह किस रीति से हिंसा और अहिंसा का समन्वय करता है। जन-रक्षा और शासन से जिनका संबंध है, उनके सामने इन दो विरोधी-सिद्धांतों के समन्वय का प्रश्न हर समय व्यावहारिक रूप में रहता है । वास्तव में मनुष्य की प्रेरणाओं में और बाह्य प्रकृति की क्रीड़ाओं में रक्षा और संहार, दोनों शक्तियां साथ काम करती दिखाई देती हें । प्रकृति हमें उत्पन्न करती है और हमारी रक्षा करती है, साथ ही अपनी एक हिलोर में हमारा नाश करती है । जिसके ऊपर समाज संचालन का दायित्व रहता है उन्हें भी रक्षा और संहार, दोनों ही काम करने पड़ते हैं । इसी अर्थ का द्योतक भगवत-गीता का वह वाक्य है 'परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुकृताम्' । दुष्टों का नाश, संसार की प्रगति का आवश्यक अंग है । यदि हमारी गहरी दृष्टि हो, तो उस हिंसा में भी हमें अहिंसा दिखाई देगी । मैं किसी को मारता हूं तो इसका यह आवश्यक अर्थ नहीं है कि मैं उसका बुरा चाहता हूं उसकी भलाई मेरे उस काम में निहित हो सकती है । हमारे हृदयों में भावनाओं का वैसे ही करुणापूर्ण संघर्ष होता है, जैसा अर्जुन के हृदय में हुआ था । सरदार, भगत सिंह ने अपने लिए किस रूप में इस समस्या का हल ढ़ूंढ़ा, यह हम इस पुस्तक से जान सकेंगे ।

 

विषय-सूची

1

प्रकाशक के नाते

सात

2

भूमिका

तेरह

अमर शहीद सरदार भगत सिंह

3

पुस्तक की जप्ती का मनोरंजक विवरण

3

4

मुकदमे का फैसला

13

अमर शहीद सरदार भगत सिंह

5

वंश-परिचय और बचपन

25

6

हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन

29

7

अध्ययन

31

8

क्रांतिकारी दल में प्रारंभिक कार्य

33

9

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन

36

10

सांडर्स हत्याकांड

39

11

असेंबली में बमकांड

45

12

बमकांड के संबंध में

47

13

भूख हड़ताल

51

14

लाहौर कांसपिरेसी केस

55

15

फैसला और उसके बाद

60

16

फांसियां

64

17

कुछ संस्मरण

67

 

परिशिष्ट

72

स्वर्गीय सरदार भगत सिंह के कुछ

प्रमुख सहयोगियों का संक्षिप्त परिचय

18

स्वर्गीय सुखदेव

81

19

स्वर्गीय शिवराम राजगुरु

84

20

स्वर्गीय चन्द्रशेखर 'आजाद'

87

21

स्वर्गीय हरिकिशन

90

लाहौर षड्यंत्र की मनोरंजक कार्यवाही

22

मुकदमों का संक्षिप्त इतिहास

97

23

पहले लाहौर षड्यंत्र केस का फैसला

100

24

स्पेशल ट्रिब्यूनल की दैनिक कार्यवाही

106

कुछ फुटकर सामग्री

25

इतिहास के विद्यार्थियों के लिए

255

 

Sample Pages
















अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar Shahid Sardar Bhagat Singh

Item Code:
NZD100
Cover:
Paperback
Edition:
2012
Publisher:
ISBN:
9788123729329
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
319(6 B/W Illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 370 gms
Price:
$15.00
Discounted:
$12.00   Shipping Free
You Save:
$3.00 (20%)
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar Shahid Sardar Bhagat Singh

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 6898 times since 11th May, 2019

पुस्तक के विषय में

अमर शहीद सरदार भगत सिंह मात्र एक जीवनी परक पुस्तक नहीं, स्वाधीनता संग्राम और मातृभूमि प्रेम का जीवंत आख्यान है । 23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास मे ब्रिटिश राज की बर्बरता का ज्वलंत उदाहरण है । इस दिन सरदार भगत सिह और उनके दो अन्य साथियों सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर चढ़ा दिया गया था । समय बीतने के साथ-साथ आज भी यह मृत्यु अतीत नहीं हुई है । आज भी यह दिन भारतीयों के लिए शहादत दिवस है । प्रस्तुत पुस्तक को सरदार भगत सिंह की जीवनी न कहकर उनकी संघर्ष कथा कहना ज्यादा बेहतर होगा । सन् 1931 में जब यह पुस्तक पहली बार अंग्रेजी में लिखी गई तो ब्रिटिश सरकार ने इसे जब्त कर लिया । उसी को आधार बनाकर इसे फिर से विस्तारपूर्वक लिखा गया और हिन्दी में पहली बार 1947 में कर्मयोगी प्रेस से इसका प्रकाशन हुआ ।

ब्रिटिश सरकार द्वारा पुस्तक जब्त करने की कलुषित मनोवृत्ति के विवरण से लेकर भगत सिंह के जीवन की तमाम महत्वपूर्ण घटनाओं, उनकी गतिविधियों, उनके संघर्षों की दास्तान तथा उनके सहकर्मियों के बलिदानों को जितने तथ्यपूर्ण ढंग से जितेन्द्रनाथ सान्याल ने इस पुस्तक में रखा है, अन्यत्र कहीं मिलना दुर्लभ है । लेखक सरदार भगत सिंह के आत्मीय मित्र थे । अपने देश और देश के इतिहास से भली भांति परिचित होने के लिए आम हिन्दी पाठकों के लिए यह एक प्रेरणादायक संग्रहणीय पुस्तक है ।

भूमिका

सरदार भगत सिंह के पार्थिव शरीर का नाश हुए 16 वर्ष से अधिक हो गए । आज. भी उनका चित्र नगरों और ग्रामों के घरों और दूकानों में, कहीं अकेला और कहीं देश के दो-चार ऐतिहासिक पुरुषों या देवताओं के चित्रों के साथ, लगा दिखाई देता हे । उनका नाम देश के कोने-कोने में फैला है और श्रद्धा से स्मरण किया जाता है । उनके बलिदान ने उनके नाम को देश की प्रिय-वस्तु बना दिया है ।

आज जब भांरतवर्ष में ब्रिटिश-शासन की समाप्ति के अंतिम दृश्य हम देख रहे हैं, हमें भगत सिंह की बरबस याद आती है । हम भूल नहीं सकते कि उस शासन की जडों को अपने क्रांतिकारी कामों और आत्म-समर्पण से भगत सिंह ने गहरा धक्का दिया था और जनता के हृदय में उसके उखाड़ फेंकने की तीव्र भावना भर दी थी ।

भगत सिंह युवावस्था में चले गए, उनकी भावनाओं की कुछ कल्पना उनके कामों और अदालत में दिए गए उनके बयानों से हम कर सकते हैं । मुझको याद है कि केंद्रीय असेंबली में बम. फेंकने के अभियोग के उत्तर में जो बयान उन्होंने अदालत में दिया था, उसका कितना गहरा प्रभाव मेरे हृदय पर पड़ा था ।

इस पुस्तक में भगत सिंह के जीवन की कड़ियों को लड़ी में बांधने का यत्न है । कई वर्ष हुए, श्री जितेन्द्रनाथ सान्याल ने अंग्रेजी में एक पुस्तक 'सरदार भगत सिंह' के शीर्षक से लिखी थी । उस पुस्तक का प्रकाशन गवर्नमेंट की आज्ञा से रोका गया था । कुछ महीने हुए हमारे प्रांत की गवर्नमेंट ने उस रोक को हटाया है । इस पुस्तक के प्रकाशक श्री रामरख सिंह सहगल की चिरंजीविनी, कुमारी स्नेहलता सहगल ने उसी पुस्तक के आधार पर यह पुस्तक लिखी है, 'किंतु इस पुस्तक में परिशिष्ट के रूप में सरदार भगत सिंह के संबंध में अधिक सामग्री दी गई है । हमारे देश के एक विशिष्ट पुरुष और उसके साथियों का विवरण होने के कारण यह पुस्तक देश के राजनीतिक इतिहास के अध्ययन में हिंदी-प्रेमियों के लिए सहायक होगी । मैं इसका स्वागत करता हूं ।

आज की स्थिति में यह पुस्तक सामयिक है। भगत सिंह और उनके साथियों का विश्वास देशवैरियों की हिंसा के पक्ष में था । इस समय यह प्रश्न एक दूसरी पृष्ठभूमि में हमारे सामने है। हिंसा अथवा अहिंसा-हमारे देश का पुराना दार्शनिक- प्रश्न है। हममें से हर एक के जीवन का रूप इस बात पर निर्भर करता है, कि वह किस रीति से हिंसा और अहिंसा का समन्वय करता है। जन-रक्षा और शासन से जिनका संबंध है, उनके सामने इन दो विरोधी-सिद्धांतों के समन्वय का प्रश्न हर समय व्यावहारिक रूप में रहता है । वास्तव में मनुष्य की प्रेरणाओं में और बाह्य प्रकृति की क्रीड़ाओं में रक्षा और संहार, दोनों शक्तियां साथ काम करती दिखाई देती हें । प्रकृति हमें उत्पन्न करती है और हमारी रक्षा करती है, साथ ही अपनी एक हिलोर में हमारा नाश करती है । जिसके ऊपर समाज संचालन का दायित्व रहता है उन्हें भी रक्षा और संहार, दोनों ही काम करने पड़ते हैं । इसी अर्थ का द्योतक भगवत-गीता का वह वाक्य है 'परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुकृताम्' । दुष्टों का नाश, संसार की प्रगति का आवश्यक अंग है । यदि हमारी गहरी दृष्टि हो, तो उस हिंसा में भी हमें अहिंसा दिखाई देगी । मैं किसी को मारता हूं तो इसका यह आवश्यक अर्थ नहीं है कि मैं उसका बुरा चाहता हूं उसकी भलाई मेरे उस काम में निहित हो सकती है । हमारे हृदयों में भावनाओं का वैसे ही करुणापूर्ण संघर्ष होता है, जैसा अर्जुन के हृदय में हुआ था । सरदार, भगत सिंह ने अपने लिए किस रूप में इस समस्या का हल ढ़ूंढ़ा, यह हम इस पुस्तक से जान सकेंगे ।

 

विषय-सूची

1

प्रकाशक के नाते

सात

2

भूमिका

तेरह

अमर शहीद सरदार भगत सिंह

3

पुस्तक की जप्ती का मनोरंजक विवरण

3

4

मुकदमे का फैसला

13

अमर शहीद सरदार भगत सिंह

5

वंश-परिचय और बचपन

25

6

हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन

29

7

अध्ययन

31

8

क्रांतिकारी दल में प्रारंभिक कार्य

33

9

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन

36

10

सांडर्स हत्याकांड

39

11

असेंबली में बमकांड

45

12

बमकांड के संबंध में

47

13

भूख हड़ताल

51

14

लाहौर कांसपिरेसी केस

55

15

फैसला और उसके बाद

60

16

फांसियां

64

17

कुछ संस्मरण

67

 

परिशिष्ट

72

स्वर्गीय सरदार भगत सिंह के कुछ

प्रमुख सहयोगियों का संक्षिप्त परिचय

18

स्वर्गीय सुखदेव

81

19

स्वर्गीय शिवराम राजगुरु

84

20

स्वर्गीय चन्द्रशेखर 'आजाद'

87

21

स्वर्गीय हरिकिशन

90

लाहौर षड्यंत्र की मनोरंजक कार्यवाही

22

मुकदमों का संक्षिप्त इतिहास

97

23

पहले लाहौर षड्यंत्र केस का फैसला

100

24

स्पेशल ट्रिब्यूनल की दैनिक कार्यवाही

106

कुछ फुटकर सामग्री

25

इतिहास के विद्यार्थियों के लिए

255

 

Sample Pages
















Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to अमर शहीद सरदार भगत सिंह: Amar... (Hindi | Books)

Bhagat Singh Jail Dairy
by Yadvinder Singh Sandhu
HARDCOVER (Edition: 2018)
PRABHAT PRAKASHAN
Item Code: NAR024
$35.00$28.00
You save: $7.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Bhagat Singh: Select Speeches and Writings
by D.N. Gupta
Paperback (Edition: 2007)
National Book Trust
Item Code: NAE398
$12.00$9.60
You save: $2.40 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Shaheed Bhagat Singh and the Forgotten Indian Martyrs
by Reginald Massey
Hardcover (Edition: 2013)
Abhinav Publications
Item Code: NAF493
$20.00$16.00
You save: $4.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Bhagat Singh (Why I am An Atheist)
by Bipan Chandra
Paperback (Edition: 2014)
National Book Trust
Item Code: IDK603
$10.00$8.00
You save: $2.00 (20%)
SOLD
The Legend of Bhagat Singh (The Daring Young Man Who Sacrificed His Life at the Alter of Independence of India)
by Vinod Tiwari
Paperback (Edition: 2013)
Manoj Publications, Delhi
Item Code: NAL128
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Without Fear (The Life and Trial of Bhagat Singh)
by Kuldip Nayar
Hardcover (Edition: 2002)
Harper Collins Publishers
Item Code: NAF701
$21.00$16.80
You save: $4.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Rethinking Radicalism in Indian Society (Bhagat Singh and Beyond)
by Jose George and Manoj Kumar
Hardcover (Edition: 2009)
Rawat Publications
Item Code: NAH012
$45.00$36.00
You save: $9.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Gandhi and Bhagat Singh
Deal 20% Off
by V.N. Datta
Hardcover (Edition: 2008)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDK692
$25.00$16.00
You save: $9.00 (20 + 20%)
Add to Cart
Buy Now
क्रान्तिकारी भगत सिंह: The Revolutionary Bhagat Singh
Deal 20% Off
by सुरेश (Suresh)
Paperback (Edition: 2011)
Hindi Sahitya Sadan
Item Code: NZE844
$12.00$7.68
You save: $4.32 (20 + 20%)
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
You have a fine selection of books on Hindu and Buddhist philosophy.
Walter, USA
I am so very grateful for the many outstanding and interesting books you have on offer.
Hans-Krishna, Canada
Appreciate your interest in selling the Vedantic books, including some rare books. Thanks for your service.
Dr. Swaminathan, USA
I received my order today, very happy with the purchase and thank you very much for the lord shiva greetings card.
Rajamani, USA
I have a couple of your statues in your work is really beautiful! Your selection of books and really everything else is just outstanding! Namaste, and many blessings.
Kimberly
Thank you once again for serving life.
Gil, USa
Beautiful work on the Ganesha statue I ordered. Prompt delivery. I would order from them again and recommend them.
Jeff Susman
Awesome books collection. lots of knowledge available on this website
Pankaj, USA
Very easy to do business with your company.
Paul Gomez, USA
Love you great selection of products including books and art. Of great help to me in my research.
William, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India