Look Inside

आषाढ का एक दिन: Ashadh ka Ek Din

$10.40
$13
(20% off)
Quantity
Ships in 1-3 days
Item Code: NZD058
Author: मोहन राकेश (Mohan Rakesh)
Publisher: Rajpal and Sons
Language: Hindi
Edition: 2013
ISBN: 8170284007
Pages: 127(28 B/W Illustrations)
Cover: Hardcover
Other Details 7.5 inch X 5.0 inch
Weight 220 gm
Fully insured
Fully insured
Shipped to 153 countries
Shipped to 153 countries
More than 1M+ customers worldwide
More than 1M+ customers worldwide
100% Made in India
100% Made in India
23 years in business
23 years in business

दो शब्द

हिन्दी नाटक रंगमंच की किसी विशेष परम्परा के साथ अनुस्यूत नहीं है । पाश्चात्य रंगमंच की उपलब्धियाँ ही हमारे सामने हैं । परन्तु न तो हमारा जीवन उन सब उपलब्धियों की माँग करता है, और न ही यह सम्भव प्रतीत होता है कि हम उस रंगशिल्प को व्यापक रूप से ज्यों का त्यों अपने यहाँ प्रतिष्ठित कर दें ।

हिन्दी रंगमंच के विकास से निस्सन्देह यह अभिप्राय नहीं है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न रंगशालाएँ राजकीय या अर्द्धराजकीय संस्थाओं द्वारा जहाँ-तहाँ बनवा दी जाएँ जिससे वहाँ हिन्दी नाटकों का प्रदर्शन किया जा सके । प्रश्न केवल आर्थिक सुविधा का ही नहीं, एक सांस्कृतिक दृष्टि का भी है । हिन्दी रंगमंच को हिन्दी-भाषी प्रदेश की सांवृतिक पूर्तियों और आकाँक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना होगा, रगों और राशियों के हमारे विवेक- को व्यक्त करना होगा । हमारे दैनंदिन जीवन के राग-रंग को प्रस्तुत करने के लिए, हमारे सम्वेदों और स्पन्दनों को अभिव्यक्त करने के लिए, जिस रंगमंच की आवश्यकता हे, वह पाश्चात्य रंगमंच से कहीं भिन्न होगा । इस रंगमंच का रूपविधान नाटकीय प्रयोगों के अभ्यन्तर से जन्म लेगा और समर्थ अभिनेताओं तथा दिग्दर्शकों के हाथों उसका विकास होगा ।

सम्भव है यह नाटक उन सम्भावनाओं की खोज में कुछ योग दे सके ।

 

पात्र

अम्बिका : ग्राम की एक वृद्धा

मल्लिका : उसकी पुत्री

कालिदास : कवि

दन्तुल : राजपुरुष

मानतुल : कवि-मातुल

निक्षेप : ग्राम-पुरुष

विलोम : ग्राम-पुरुष

रंगिणी : नागरी

अनुस्वार : अधिकारी

प्रियंगुमंजरी : राजकन्या-कवि-पत्नी

Sample Page


Add a review
Have A Question

For privacy concerns, please view our Privacy Policy

CATEGORIES