Warning: include(domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 921

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 921

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address [email protected].

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > Puranas > Bhagavata Purana > भगवत्प्राप्ति में भाव की प्रधानता: Bhagawat Prapti mein Bhav ki Pradhanta
Subscribe to our newsletter and discounts
भगवत्प्राप्ति में भाव की प्रधानता: Bhagawat Prapti mein Bhav ki Pradhanta
भगवत्प्राप्ति में भाव की प्रधानता: Bhagawat Prapti mein Bhav ki Pradhanta
Description

निवेदन

परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाने अपने जीवनकालमें स्थान- स्थानपर बहुत ही भगवदविषयक प्रवचन दिये, उनका एकमात्र उद्देश्य था कि हमलोगोंका, मनुष्यमात्रका उद्धार हो। इन प्रवचनोंके अन्तर्गत एक बहुत ही रहस्यमय बात पड़ी गयी । उसमें बताया गया कि भगवान् रामचन्द्रजी जब अन्तर्धान होने लगे तो अयोध्यावासियोंको सरयूकी धारमें गोता लगवाकर अपने साथ परमधाम ले गये। भगवान् श्रीकृष्णने ऐरे (एक प्रकारकी घास) की धारसे यदुवंशियोंका उद्धार किया। इसी प्रकार मैं (गोयन्दकाजी) पुस्तकों एवं सत्संगद्वारा मनुष्योंका उद्धार करता हूँ। यह बात पढ़-सुनकर हमारे रोमांश हो जाना चाहिये। ऐसे अधिकार-प्राप्त महापुरुषके प्रवचन हमें सुनने-पढ़नेको मिल जायँ, यह हमारा कितना अहोभाग्य है। ऐसे प्रवचनोंको पढ़कर, मननकर जीवनमें लाकर हम केवल अपना उद्धार ही नहीं, अनेक भाई-बहिनोंका उद्धार करानेमें सहायक हो सकते हैं। उन्हीं महापुरुषके समय-समयपर दिये गये हुए प्रवचनोंको कई सजनोंने लिख लिया एवं टेप कर लिया।

भाई-बहिनोंको उन प्रवचनोंसे लाभ मिल जाय, इस हेतु उन प्रवचनोंको पुस्तकोंका रूप देकर प्रकाशित किया जा रहा है। हमें आशा है कि आपलोग इन प्रवचनोंको मनोयोगपूर्वक पढकर लाभ उठायेंगे।

 

 

विषय-सूची

 

1

भगवत्प्राप्तिमें भावकी प्रधानता

1

2

कर्तव्य- पालन एवं दूसरोंके अधिकारकी रक्षा

15

3

निष्कामभावकी सूक्ष्मता

32

4

सत्संगका रहस्य

41

5

महात्मासे कैसे लाभ उठावें

51

6

पात्रता एवं श्रद्धा

56

7

सगुण- साकार भगवान्का दर्शन एवं प्रभाव

71

8

महत्वपूर्ण बात

88

9

मनुष्य- जीवनकी सफलताका उपाय

105

10

वीरताका रहस्य

120

11

कल्याण-प्राप्तिका सरल साधन

129

12

भगवान् एवं महात्माका प्रभाव

135

13

साधन तीव्र करनेके लिये प्रेरणा

143

14

भगवत्स्मृतिकी महिमा

153

भगवत्प्राप्ति में भाव की प्रधानता: Bhagawat Prapti mein Bhav ki Pradhanta

Deal 20% Off
Item Code:
GPA318
Cover:
Paperback
Edition:
2011
Language:
Sanskrit Text with Hindi Translation
Size:
8.0 inch X 5.0 inch
Pages:
156
Other Details:
Weight of the Book: 130 gms
Price:
$8.00
Discounted:
$6.40   Shipping Free
You Save:
$1.60 (20%)
Be the first to rate this product
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
भगवत्प्राप्ति में भाव की प्रधानता: Bhagawat Prapti mein Bhav ki Pradhanta
From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3653 times since 3rd Sep, 2019

निवेदन

परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाने अपने जीवनकालमें स्थान- स्थानपर बहुत ही भगवदविषयक प्रवचन दिये, उनका एकमात्र उद्देश्य था कि हमलोगोंका, मनुष्यमात्रका उद्धार हो। इन प्रवचनोंके अन्तर्गत एक बहुत ही रहस्यमय बात पड़ी गयी । उसमें बताया गया कि भगवान् रामचन्द्रजी जब अन्तर्धान होने लगे तो अयोध्यावासियोंको सरयूकी धारमें गोता लगवाकर अपने साथ परमधाम ले गये। भगवान् श्रीकृष्णने ऐरे (एक प्रकारकी घास) की धारसे यदुवंशियोंका उद्धार किया। इसी प्रकार मैं (गोयन्दकाजी) पुस्तकों एवं सत्संगद्वारा मनुष्योंका उद्धार करता हूँ। यह बात पढ़-सुनकर हमारे रोमांश हो जाना चाहिये। ऐसे अधिकार-प्राप्त महापुरुषके प्रवचन हमें सुनने-पढ़नेको मिल जायँ, यह हमारा कितना अहोभाग्य है। ऐसे प्रवचनोंको पढ़कर, मननकर जीवनमें लाकर हम केवल अपना उद्धार ही नहीं, अनेक भाई-बहिनोंका उद्धार करानेमें सहायक हो सकते हैं। उन्हीं महापुरुषके समय-समयपर दिये गये हुए प्रवचनोंको कई सजनोंने लिख लिया एवं टेप कर लिया।

भाई-बहिनोंको उन प्रवचनोंसे लाभ मिल जाय, इस हेतु उन प्रवचनोंको पुस्तकोंका रूप देकर प्रकाशित किया जा रहा है। हमें आशा है कि आपलोग इन प्रवचनोंको मनोयोगपूर्वक पढकर लाभ उठायेंगे।

 

 

विषय-सूची

 

1

भगवत्प्राप्तिमें भावकी प्रधानता

1

2

कर्तव्य- पालन एवं दूसरोंके अधिकारकी रक्षा

15

3

निष्कामभावकी सूक्ष्मता

32

4

सत्संगका रहस्य

41

5

महात्मासे कैसे लाभ उठावें

51

6

पात्रता एवं श्रद्धा

56

7

सगुण- साकार भगवान्का दर्शन एवं प्रभाव

71

8

महत्वपूर्ण बात

88

9

मनुष्य- जीवनकी सफलताका उपाय

105

10

वीरताका रहस्य

120

11

कल्याण-प्राप्तिका सरल साधन

129

12

भगवान् एवं महात्माका प्रभाव

135

13

साधन तीव्र करनेके लिये प्रेरणा

143

14

भगवत्स्मृतिकी महिमा

153

Post a Comment
 
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to भगवत्प्राप्ति में भाव की... (Hindu | Books)

आदिदेव आर्य देवता: Aadi Dev Arya God
Deal 20% Off
by Sandhya Jain
HARDCOVER (Edition: 2018)
PRABHAT PRAKASHAN, DELHI
Item Code: NZT558
$29.00$23.20
You save: $5.80 (20%)
Add to Cart
Buy Now
ईश्वर और संसार: God and World
Deal 20% Off
Item Code: GPA141
$8.00$6.40
You save: $1.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
प्रभु का प्राकटय: Appearance of God
by Swami Anubhavananda
PAPERBACK (Edition: 2014)
Indra Publishing House
Item Code: NZR953
$16.00
Add to Cart
Buy Now
भक्त और भगवान: Devotion and God
Item Code: NZR543
$16.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Thank you so much. Your service is amazing. 
Kiran, USA
I received the two books today from my order. The package was intact, and the books arrived in excellent condition. Thank you very much and hope you have a great day. Stay safe, stay healthy,
Smitha, USA
Over the years, I have purchased several statues, wooden, bronze and brass, from Exotic India. The artists have shown exquisite attention to details. These deities are truly awe-inspiring. I have been very pleased with the purchases.
Heramba, USA
The Green Tara that I ordered on 10/12 arrived today.  I am very pleased with it.
William USA
Excellent!!! Excellent!!!
Fotis, Greece
Amazing how fast your order arrived, beautifully packed, just as described.  Thank you very much !
Verena, UK
I just received my package. It was just on time. I truly appreciate all your work Exotic India. The packaging is excellent. I love all my 3 orders. Admire the craftsmanship in all 3 orders. Thanks so much.
Rajalakshmi, USA
Your books arrived in good order and I am very pleased.
Christine, the Netherlands
Thank you very much for the Shri Yantra with Navaratna which has arrived here safely. I noticed that you seem to have had some difficulty in posting it so thank you...Posting anything these days is difficult because the ordinary postal services are either closed or functioning weakly.   I wish the best to Exotic India which is an excellent company...
Mary, Australia
Love your website and the emails
John, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2020 © Exotic India