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योग पारिजात (अनुपम योग, धन योग, राज योग, भाग्य योग)- The Complete Collection of Yoga Parijat (Anupam Yoga, Yoga of Money, Raja Yoga, Yoga of Luck) (Set of 4 Volumes)

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Item Code: NAI879
Author: मृदुला त्रिवेदी और टी. पी. त्रिवेदी (Mridula Trivedi and T. P. Trivedi)
Publisher: Alpha Publications
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Edition: 2014
Pages: 1984
Cover: Paperback
Other Details 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 2.30 kg
Fully insured
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पुस्तक के विषय में

 योग पारिजात में समस्त प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, प्रशंसित, प्राचीन ज्योतिषशास्त्र के प्रमाणित शास्त्रीय ग्रंथो के मनन, मन्थन और चिंतन के अथक प्रयास, परिश्रमसाध्य साधना के उपरांत विविध विशिष्ट ग्रहयोगों को व्यवहारिक जन्मांगों के निकष पर परख कर, उनका स्पष्ट सतर्क श्रंखलाबद्ध चयन और संकलन करके प्रबुद्ध पाठको को अनादिकाल से चली आ रही जिज्ञासा का सम्यक, सारगर्भित, सार्वभौमिक, सर्वजनहितार्थ समाधान से संदर्भित ग्रहयोगों से सम्बंधित तथा व्यक्ति के व्यवसाय, व्यस्तता, विलासिता की उपलब्धिता, प्रभुता, अधिकारों की समग्रता, ऐश्वर्य, कीर्ति, वैभव, सम्पति, समृद्धि, सत्ता, सम्पदा, सौभाग्य के अतिरिक्त सिंघासन तथा राज्य प्राप्ति के अन्यान्य योगो के साथ साथ विपन्नता, दरिद्रता, चिन्ता, विपत्ति, विनाश, विफलता, विकृति, व्यवधान, अवरोध, अनैतिकता, दुर्भाग्य, दुर्दमनीय दारुण दुखो की व्यथा, धनहानि, आस्था तथा विश्वास की निर्बलता, धूर्तता, दैहिक सफलता तथा पुष्टता से सम्बंधित सभी ग्रहयोगों तथा पाठको की जिज्ञासा का तर्कसंगत विवेचन, विवरण, व्यवहारिक विश्लेषण सहित प्रत्युत्तर सन्निहित, समाहित व् समायोजित है | किस भी जन्मांग से सम्बंधित भविष्य के आकलन हेतु ग्रहयोगों का विस्तृत, सारगर्भित, सारस्वत व तलस्पर्शी अध्ययन, अनुभव, अभ्यास और अनुसंधान का महत्व सर्वोपरि है जिसके आभाव में जातक की प्रभुता, सत्ता, संपदा, समृद्धि तथा प्रशासन आदि से संदर्भित सटीक अनुमान संभव नही है | योग पारिजात को १. राजयोग २. भाग्य योग ३. धन योग ४. अनुपम योग से शीर्षकित किया गया है जिसके अंतर्गत ८५० प्रामाणिक, शास्त्रगर्भित तथा आचार्यनुमोदित ग्रहयोग, विविध जन्मांगों के उदाहरण सहित सन्निहित है | इसके अतिरिक्त सूर्य और चन्द्रमा से संदर्भित ग्रहयोग, केन्द्रत्रिकों राजयोग, महापुरुष राजयोग, महाभाग्य योग, अखण्ड साम्राज्य योग, उच्चस्थ ग्रहकृत राजयोग, रषीकृत राजयोग, विपरीत राजयोग, नीचभंग तथा राजभंग ग्रहयोग, विपन्नता प्रदायक ग्रहयोग, नभस योग, नवांश संदर्भित शुभ और अशुभ ग्रहयोग तथा नवांश चक्र पर आधारित राजयोग आदि शीर्षकित विविध अध्यायों में संस्कृत के श्लोको में वर्णित ग्रहयोगों को ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक धरातल पर परखकर तथा सहस्त्रो जातको, जातिकाओ आदि के जन्मांगों पर क्रियान्वित करने के उपरांत जिज्ञासु पाठको के कल्याणार्थ योग पारिजात में सुरुचिपूर्ण स्वरुप में समायोजित किया गया है |

योग पारिजात (अनुपम योग)








योग पारिजात (धन योग)





योग पारिजात (राजयोग)




योग पारिजात (भाग्य योग)



Sample Pages (अनुपम योग)


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