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Books > Hindi > सन्त वाणी > जयदयाल गोयन्दका > सत्संग की मार्मिक बातें: Essence of Satsang
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सत्संग की मार्मिक बातें: Essence of Satsang
सत्संग की मार्मिक बातें: Essence of Satsang
Description

निवेदन

सभी सदग्रन्थ इस बातपर प्रकाश डालते हैं और विशेषतासे प्रतिपादन करते हैं कि मनुष्य जीवनका एकमात्र उद्देश्य भगवत्प्राप्ति है । उपनिषद्, गीता, रामायण सभीमें यह बात विशेषतासे कही गयी है । इह चेदवेदीदथ सत्यमस्ति न चेदिहावेदीन्महती विनष्टि । यदि इस मनुष्य जीवनमें परमात्मतत्त्वको जान लिया तो ठीक है नहीं तो महान् हानि है । जो यह बात उपनिषद आदिमें कही गयी है, इसी बातको जीवमुक्त महापुरुष कहते हैं तो उस बातमें एक विशेष महत्त्व हो जाता है । वे जो कुछ कहते हैं, स्वयं अनुभव करके कहते हैं और जिस साधनसे उन्होंने अनुभव किया है, उसीपर चलनेके लिये हमें प्रेरणा देते हैं ।

परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाका भगवान्में इतना प्रेम हुआ कि भगवान्ने उनके सामने प्रत्यक्ष प्रकट होकर साकाररूपसे दर्शन दिये । इसलिये वे जो बातें कहते हैं उनसे हमें कितना अधिक आध्यात्मिक लाभ हो सकता है, यह हम स्वयं विचार करें । श्रद्धेय श्रीगोयन्दकाजीका एकमात्र उद्देश्य हमलोगोंका जन्म मरणसे उद्धार करनेका था तथा जो आनन्द उन्हें मिला, वह हमें भी मिल जाय । अत उन्हें सत्संग बहुत प्रिय था और इसका आयोजन वे स्वर्गाश्रममें गंगाजीके पावन तटपर ग्रीष्म ऋतुमें करते थे । वहाँपर तथा अन्यत्र जो भी प्रवचन मनुष्योंके कल्याणके लिये उन्होंने दिये, उनमेंसे कुछको यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है, जिससे हमलोग अब भी उनसे आध्यात्मिक लाभ उठा लें । हमें आशा है, पाठकगण इन्हें पढ़ेंगे और मनन करेंगे ।

 

विषय सूची

1

अच्छे आचरणोंकी महत्ता

5

2

आनन्दके ध्यानकी विधि

8

3

आध्यात्मिक प्रश्नोत्तर

13

4

ध्यानका महत्त्व

19

5

आनन्दके स्वरूपका वर्णन

21

6

भक्ति तथा पतिव्रताकी महिमा

31

7

ध्यानमें वटवृक्षके स्थानकी महिमा

36

8

मनुष्य जीवनकी अमूल्यता

39

9

त्याग, वैराग्य और उपरामता

41

10

गुप्त भजन एवं सेवाकी महत्ता

50

11

सत्संगसे लाभ और सेवा किसीसे स्वीकार न करें

55

12

निष्कामभावकी महिमा

58

13

घरमें त्यागका व्यवहार एवं अतिथिसेवाकी महिमा

61

14

स्वार्थरहित सेवाकी महिमा

70

15

जो कुछ है सब परमात्मा ही है

79

16

अनन्यभक्तिकी महिमा

86

17

विरह और प्रेमकी साधना

100

18

भगवत्प्राप्ति कठिन नहीं

105

19

एकादशीव्रतकी विधि एवं महिमा

107

20

भगवान्की एवं गीताजीकी विशेषता

110

21

महापुरुषोंमें श्रद्धा और भावकी विशेषता

119

22

मार्मिक बातें

127

23

क्षणमें स्थिति कैसे बदले?

136

 

सत्संग की मार्मिक बातें: Essence of Satsang

Deal 20% Off
Item Code:
GPA116
Cover:
Paperback
Edition:
2012
ISBN:
9788129310699
Language:
Sanskrit Text With Hindi Translation
Size:
8.0 inch X 5.0 inch
Pages:
144
Other Details:
Weight of the Book: 140 gms
Price:
$4.00
Discounted:
$3.20   Shipping Free
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सत्संग की मार्मिक बातें: Essence of Satsang
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निवेदन

सभी सदग्रन्थ इस बातपर प्रकाश डालते हैं और विशेषतासे प्रतिपादन करते हैं कि मनुष्य जीवनका एकमात्र उद्देश्य भगवत्प्राप्ति है । उपनिषद्, गीता, रामायण सभीमें यह बात विशेषतासे कही गयी है । इह चेदवेदीदथ सत्यमस्ति न चेदिहावेदीन्महती विनष्टि । यदि इस मनुष्य जीवनमें परमात्मतत्त्वको जान लिया तो ठीक है नहीं तो महान् हानि है । जो यह बात उपनिषद आदिमें कही गयी है, इसी बातको जीवमुक्त महापुरुष कहते हैं तो उस बातमें एक विशेष महत्त्व हो जाता है । वे जो कुछ कहते हैं, स्वयं अनुभव करके कहते हैं और जिस साधनसे उन्होंने अनुभव किया है, उसीपर चलनेके लिये हमें प्रेरणा देते हैं ।

परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाका भगवान्में इतना प्रेम हुआ कि भगवान्ने उनके सामने प्रत्यक्ष प्रकट होकर साकाररूपसे दर्शन दिये । इसलिये वे जो बातें कहते हैं उनसे हमें कितना अधिक आध्यात्मिक लाभ हो सकता है, यह हम स्वयं विचार करें । श्रद्धेय श्रीगोयन्दकाजीका एकमात्र उद्देश्य हमलोगोंका जन्म मरणसे उद्धार करनेका था तथा जो आनन्द उन्हें मिला, वह हमें भी मिल जाय । अत उन्हें सत्संग बहुत प्रिय था और इसका आयोजन वे स्वर्गाश्रममें गंगाजीके पावन तटपर ग्रीष्म ऋतुमें करते थे । वहाँपर तथा अन्यत्र जो भी प्रवचन मनुष्योंके कल्याणके लिये उन्होंने दिये, उनमेंसे कुछको यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है, जिससे हमलोग अब भी उनसे आध्यात्मिक लाभ उठा लें । हमें आशा है, पाठकगण इन्हें पढ़ेंगे और मनन करेंगे ।

 

विषय सूची

1

अच्छे आचरणोंकी महत्ता

5

2

आनन्दके ध्यानकी विधि

8

3

आध्यात्मिक प्रश्नोत्तर

13

4

ध्यानका महत्त्व

19

5

आनन्दके स्वरूपका वर्णन

21

6

भक्ति तथा पतिव्रताकी महिमा

31

7

ध्यानमें वटवृक्षके स्थानकी महिमा

36

8

मनुष्य जीवनकी अमूल्यता

39

9

त्याग, वैराग्य और उपरामता

41

10

गुप्त भजन एवं सेवाकी महत्ता

50

11

सत्संगसे लाभ और सेवा किसीसे स्वीकार न करें

55

12

निष्कामभावकी महिमा

58

13

घरमें त्यागका व्यवहार एवं अतिथिसेवाकी महिमा

61

14

स्वार्थरहित सेवाकी महिमा

70

15

जो कुछ है सब परमात्मा ही है

79

16

अनन्यभक्तिकी महिमा

86

17

विरह और प्रेमकी साधना

100

18

भगवत्प्राप्ति कठिन नहीं

105

19

एकादशीव्रतकी विधि एवं महिमा

107

20

भगवान्की एवं गीताजीकी विशेषता

110

21

महापुरुषोंमें श्रद्धा और भावकी विशेषता

119

22

मार्मिक बातें

127

23

क्षणमें स्थिति कैसे बदले?

136

 

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