Warning: include(domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address [email protected].

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > साहित्य > साहित्य का इतिहास > गुरु रविदास: Guru Ravidas
Subscribe to our newsletter and discounts
गुरु रविदास: Guru Ravidas
Pages from the book
गुरु रविदास: Guru Ravidas
Look Inside the Book
Description

पुस्तक के विषय में

हमारे प्राचीन ग्रंथों में मानव समाज के लिए ही समानता थी तथा जाति-पांति और ऊंच-नीच के भेदभाव नहीं थें । इन्हीं का प्रभाव रविदासजी पर पड़ा । चर्मकार जाति में जन्म पाकर रविदासजी ने निराश, दलित, पीड़ित वर्ग को नवजीवन और आशा एवं आश्वासन 'भरा व्यावहारिक संदेश दिया । उनकी सर्वप्रमुख देन 'मानव समानता' का विचार है ।

आचार्य पृथ्वीसिंह आजाद एक समाजसेवक और राजनैतिक कार्यकर्ता रहे हैं । संत साहित्य में उनकी विशेष रुचि थी । रविदासिया जाति में जन्म लेकर उन्होंने रविदास की विचारधारा का प्रचार किया । वह पंजाब के 'भूतपूर्व उपमुख्यमंत्री एवं 'भारतीय संविधान सभा के भूतपूर्व सदस्य थे ।

प्रस्तावना

हमारे इस धर्म-परायण देश में समय-समय पर ऐसे महापुरुषों का प्रादुर्भाव होता रहा है जिन्होंने भारत के धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक इतिहास को अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण देन से समृद्ध किया है । ऐसे असाधारण व्यक्तियों में उन संतों और भक्तों के नाम प्रथम पंक्ति में आते हैं जिन्होंने हिदू-धर्म और संस्कृति के वास्तविक स्वरूप और गौरव को बनाए रखा एवं समाज के तिरस्कृत, उत्पीड़ित और निराश्रित लोगों को आदर, आश्रय और सांत्वना प्रदान करके ऐसे समाज की रचना का प्रयत्न किया, जिसमें सभी को समता और स्वतंत्रता के आधार पर जीवन का अधिकार मिल सके । ऐसे परम संतों में भक्त शिरोमणि श्री गुरु रविदासजी का नाम बड़े आदर से लिया जाता है जिन्होंने चर्मकार जाति में जन्म लेकर भी पुरातन संस्कृति के सच्चे स्वरूप को निखारने का प्रयास किया और उसे युग-युगांतर तक बनाए रखने के लिए महान कार्य किया।

गुरु रविदासजी को 14वीं शती के उन संत कवियों में एक अग्रगण्य स्थान प्राप्त है जिन्होंने सहज और सरल भाषा में अपनी वाणी द्वारा भक्ति रस की पावन गंगा बहाई, मानव-मात्र के लिए समता का संदेश दिया, तत्कालीन भारत के करोड़ों अशांत लोगों को आश्वस्ति एवं शांति प्रदान की और अंधविश्वासों व ,असमानता से पीड़ित जन-मानस का उद्बोधन किया ।

रविदासजी जन्मजात संत थे । वे गृहस्थ जीवन के बंधनों में जकड़े रहने पर भी पूरे संत ही रहे। उन्होंने भक्ति-आदोलन को एक नई दिशा देकर उसे मानव-कल्याण और समाज-सुधार आदोलन का स्वरूप प्रदान किया, जिससे सामाजिक संगठन को अनोखी प्रेरक शक्ति मिली । इससे न केवल पुरातन संस्कृति की रहा हुई, अपितु मानवता को बचाए रखने में भी मदद मिली। फलत: ' 'मानव-मानव सभी समान'' की भावनाओं ने एक ऐसे जन-कल्पाणकारी आंदोलन का रूप धारण किया जिसमें कर्ममय जीवन को ही वास्तविक धर्म माना जाने लगा । रविदासजी ने ''कर्म ही धर्म है'' के सिद्धांत को अपनाकर गीता के इस आदेश की ही पुष्टि की है कि ईश्वर का आश्रय लेकर सदा कर्म करता हुआ मनुष्य भगवत-कृपा से अनश्वर परमपद को प्राप्त करता है (गीता 18,56 )। रविदासजी ने अपनी वाणी में कहा है कि-

जिहा सों ओंकार जप, हत्थन सों कर कार

राम मिलहिं घर आइ फेर, कहि रविदास विचार ।

नेक कमाई जय करहि, ग्रह तजि बन नहि जाय,

रविदास हमारो राम राय ग्रह महि मिलिहिं आय ।

सतगुरु रविदास की वाणी में कटुता नहीं, अपितु मधुरता और विनम्रता है । उन्होंने न तो किसी पर कठोर, आक्षेप किए और न व्यंग्य । वे कबीर के समसामयिक तो थे परंतु उन्होंने कबीर की भाषा का प्रयोग नही किया । वे मधुर स्वभाव के सच्चे, वैष्णव, 'अहिसक, निरभिमानी परमसंत थे, जिन्होने ,अनेक कठिनाइयों को सहकर भी भगवत-भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ा और परिश्रम से अपनी रोजी-रोटी कमाई, साधु-संतों की सेवा की और ऐसे समाज की स्थापना के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे जहां सबको समानता, आत्मिक शांति और सुख मिल सके ।

रविदास ने भिन्न-भिन्न संप्रदायों तथा मतवाद के प्रभाव को आत्मसात करके अपने धर्म-प्रचार और समाज-सुधार अभियान को एक स्वतंत्र रूप दिया था जिसे हम मानवधर्म अथवा विश्वधर्म की संज्ञा दे सकते हैं । यहां न तो किसी कर्मकांड का बंधन है, न वर्ण तथा जाति पर आधारित कोई सीमा । गुरु रविदास की जनकल्याण की इस विचारधारा ने ही उन्हें सर्वजन श्रद्धेय संत बना दिया । संत शिरोमणि गुरु रविदासजी की जीवन-गाथाएं और उनकी अमृतवाणी 'आज के इस वैज्ञानिक के युग में भी भावहीन कठोर मानव हृदय को द्रवित और रस-प्लावित करने की क्षमता रखती है तथा पिछड़े वर्ग के करोड़ों लोगों को सांत्वना देकर उनका मार्गदर्शन करती है ।

महापुरुषों का जीवन और उनका अमर संदेश जन-साधारण के लिए ''रोशनी के मीनार'' का काम करता है अत: यह आवश्यक है कि जन-साधारण को देश की उन महान विभूतियों के विषय में जानकारी दी जाए ताकि वे जान सके कि हमारा देश किन-किन परिस्थितियों का सामना करता हुआ यहां तक उना पहुंचा है, जहां हम आज हैं ।

''राष्ट्रीय जीवनचरित'' के अंतर्गत यह जो गुरु रविदासजी की जीवनी पाठको को भेट की जा रही है, इसका उद्देश्य विद्वतापूर्ण और सर्वांगीण तरीके से रविदास का जीवन-वृत्त प्रस्तुत करना नहीं है, अपितु सर्वसाधारण को उस परम संत गुरु रविदास के विषय में कुछ जानकारी देना है, जिनकी पवित्र वाणी में निर्माणकारी तब, जीवन की पवित्रता, आचरण की शुद्धता, वासनाओं से मुक्ति, प्रभु से मिलन की तड़प, मानव प्रेम, उदारता, शील, क्षमा, संतोष, साधुता, विनम्रता, विवेकशीलता आदि अनेक विशेषताएं हैं जो आज के इस वैज्ञानिक युग के भटके हुए इंसान को प्रभावित करके उसे मानव से महामानव बनाने की क्षमता रखती हैं । संतों और भक्तों ने अपनी पवित्र वाणियों में जनता की भाषा का प्रयोग करके उन्हें 'अपना अमर संदेश दिया है । जिन शाश्वत मूल्यों को इनवाणियों में व्यक्त किया गया है वे प्रत्येक देश, समाज और काल के लिए अपनी विशेष उपयुक्तता रखती हैं । रविदासजी की जीवन गाथा और उनकी अमृत वाणी भी जन-कल्याणी है । जन-कल्याण के लिए ही यह पुस्तक लिखी गई है ।

मैं न तो कोई विद्वान हूं और न अच्छा लेखक । ही, एक जन्मजात समाज सेवक जरूर हूं जिसका संबंध रविदास परिवार से है । मेरी समाज सेवा और रविदास में श्रद्धा एवं निष्ठा को देखकर ही 'नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया' ने मुझसे यह छोटी-सी पुस्तक श्री गुरु रविदास सभा, यू,के, के आग्रह पर लिखवाई है । इस पुस्तक को 'नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने छापने का निश्चय करके हमारे समाज की एक बहुत बड़ी सेवा की है जिसके लिए मैं अपने समाज की ओर से आभार प्रकट करता हूं । मुझे आशा है कि जिस श्रद्धा और भावना से प्रेरित होकर मैंने यह पुस्तक लिखी है, उसी भावना से इसे पाठक-वृद देखेंगे और जहां कहीं कोई भूल देखें, उसे ठीक करके मुझे सूचित करेंगे ताकि उसका सुधार कर सकूं ।

 

विषयनुक्रम

प्रस्तावना

1

रामानंद का भक्ति-आदोलन और गुरु रविदास

1

2

गुरु रविदास-जीवन

7

3

गुरु रविदास वाणी की विशेषताएं एवं विचारधारा

32

4

गुरु रविदासजी की भक्ति भावना तथा भक्ति साधना

38

5

गुरु रविदासजी की समाज को देन

45

6

रविदास वाणी

साखी भाग

49

पद भाग

56

गुरु रविदास: Guru Ravidas

Item Code:
NZD093
Cover:
Paperback
Edition:
2014
Publisher:
ISBN:
9788123727233
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
79
Other Details:
Weight of the Book: 115 gms
Price:
$10.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
गुरु रविदास: Guru Ravidas

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 4509 times since 14th Feb, 2019

पुस्तक के विषय में

हमारे प्राचीन ग्रंथों में मानव समाज के लिए ही समानता थी तथा जाति-पांति और ऊंच-नीच के भेदभाव नहीं थें । इन्हीं का प्रभाव रविदासजी पर पड़ा । चर्मकार जाति में जन्म पाकर रविदासजी ने निराश, दलित, पीड़ित वर्ग को नवजीवन और आशा एवं आश्वासन 'भरा व्यावहारिक संदेश दिया । उनकी सर्वप्रमुख देन 'मानव समानता' का विचार है ।

आचार्य पृथ्वीसिंह आजाद एक समाजसेवक और राजनैतिक कार्यकर्ता रहे हैं । संत साहित्य में उनकी विशेष रुचि थी । रविदासिया जाति में जन्म लेकर उन्होंने रविदास की विचारधारा का प्रचार किया । वह पंजाब के 'भूतपूर्व उपमुख्यमंत्री एवं 'भारतीय संविधान सभा के भूतपूर्व सदस्य थे ।

प्रस्तावना

हमारे इस धर्म-परायण देश में समय-समय पर ऐसे महापुरुषों का प्रादुर्भाव होता रहा है जिन्होंने भारत के धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक इतिहास को अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण देन से समृद्ध किया है । ऐसे असाधारण व्यक्तियों में उन संतों और भक्तों के नाम प्रथम पंक्ति में आते हैं जिन्होंने हिदू-धर्म और संस्कृति के वास्तविक स्वरूप और गौरव को बनाए रखा एवं समाज के तिरस्कृत, उत्पीड़ित और निराश्रित लोगों को आदर, आश्रय और सांत्वना प्रदान करके ऐसे समाज की रचना का प्रयत्न किया, जिसमें सभी को समता और स्वतंत्रता के आधार पर जीवन का अधिकार मिल सके । ऐसे परम संतों में भक्त शिरोमणि श्री गुरु रविदासजी का नाम बड़े आदर से लिया जाता है जिन्होंने चर्मकार जाति में जन्म लेकर भी पुरातन संस्कृति के सच्चे स्वरूप को निखारने का प्रयास किया और उसे युग-युगांतर तक बनाए रखने के लिए महान कार्य किया।

गुरु रविदासजी को 14वीं शती के उन संत कवियों में एक अग्रगण्य स्थान प्राप्त है जिन्होंने सहज और सरल भाषा में अपनी वाणी द्वारा भक्ति रस की पावन गंगा बहाई, मानव-मात्र के लिए समता का संदेश दिया, तत्कालीन भारत के करोड़ों अशांत लोगों को आश्वस्ति एवं शांति प्रदान की और अंधविश्वासों व ,असमानता से पीड़ित जन-मानस का उद्बोधन किया ।

रविदासजी जन्मजात संत थे । वे गृहस्थ जीवन के बंधनों में जकड़े रहने पर भी पूरे संत ही रहे। उन्होंने भक्ति-आदोलन को एक नई दिशा देकर उसे मानव-कल्याण और समाज-सुधार आदोलन का स्वरूप प्रदान किया, जिससे सामाजिक संगठन को अनोखी प्रेरक शक्ति मिली । इससे न केवल पुरातन संस्कृति की रहा हुई, अपितु मानवता को बचाए रखने में भी मदद मिली। फलत: ' 'मानव-मानव सभी समान'' की भावनाओं ने एक ऐसे जन-कल्पाणकारी आंदोलन का रूप धारण किया जिसमें कर्ममय जीवन को ही वास्तविक धर्म माना जाने लगा । रविदासजी ने ''कर्म ही धर्म है'' के सिद्धांत को अपनाकर गीता के इस आदेश की ही पुष्टि की है कि ईश्वर का आश्रय लेकर सदा कर्म करता हुआ मनुष्य भगवत-कृपा से अनश्वर परमपद को प्राप्त करता है (गीता 18,56 )। रविदासजी ने अपनी वाणी में कहा है कि-

जिहा सों ओंकार जप, हत्थन सों कर कार

राम मिलहिं घर आइ फेर, कहि रविदास विचार ।

नेक कमाई जय करहि, ग्रह तजि बन नहि जाय,

रविदास हमारो राम राय ग्रह महि मिलिहिं आय ।

सतगुरु रविदास की वाणी में कटुता नहीं, अपितु मधुरता और विनम्रता है । उन्होंने न तो किसी पर कठोर, आक्षेप किए और न व्यंग्य । वे कबीर के समसामयिक तो थे परंतु उन्होंने कबीर की भाषा का प्रयोग नही किया । वे मधुर स्वभाव के सच्चे, वैष्णव, 'अहिसक, निरभिमानी परमसंत थे, जिन्होने ,अनेक कठिनाइयों को सहकर भी भगवत-भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ा और परिश्रम से अपनी रोजी-रोटी कमाई, साधु-संतों की सेवा की और ऐसे समाज की स्थापना के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे जहां सबको समानता, आत्मिक शांति और सुख मिल सके ।

रविदास ने भिन्न-भिन्न संप्रदायों तथा मतवाद के प्रभाव को आत्मसात करके अपने धर्म-प्रचार और समाज-सुधार अभियान को एक स्वतंत्र रूप दिया था जिसे हम मानवधर्म अथवा विश्वधर्म की संज्ञा दे सकते हैं । यहां न तो किसी कर्मकांड का बंधन है, न वर्ण तथा जाति पर आधारित कोई सीमा । गुरु रविदास की जनकल्याण की इस विचारधारा ने ही उन्हें सर्वजन श्रद्धेय संत बना दिया । संत शिरोमणि गुरु रविदासजी की जीवन-गाथाएं और उनकी अमृतवाणी 'आज के इस वैज्ञानिक के युग में भी भावहीन कठोर मानव हृदय को द्रवित और रस-प्लावित करने की क्षमता रखती है तथा पिछड़े वर्ग के करोड़ों लोगों को सांत्वना देकर उनका मार्गदर्शन करती है ।

महापुरुषों का जीवन और उनका अमर संदेश जन-साधारण के लिए ''रोशनी के मीनार'' का काम करता है अत: यह आवश्यक है कि जन-साधारण को देश की उन महान विभूतियों के विषय में जानकारी दी जाए ताकि वे जान सके कि हमारा देश किन-किन परिस्थितियों का सामना करता हुआ यहां तक उना पहुंचा है, जहां हम आज हैं ।

''राष्ट्रीय जीवनचरित'' के अंतर्गत यह जो गुरु रविदासजी की जीवनी पाठको को भेट की जा रही है, इसका उद्देश्य विद्वतापूर्ण और सर्वांगीण तरीके से रविदास का जीवन-वृत्त प्रस्तुत करना नहीं है, अपितु सर्वसाधारण को उस परम संत गुरु रविदास के विषय में कुछ जानकारी देना है, जिनकी पवित्र वाणी में निर्माणकारी तब, जीवन की पवित्रता, आचरण की शुद्धता, वासनाओं से मुक्ति, प्रभु से मिलन की तड़प, मानव प्रेम, उदारता, शील, क्षमा, संतोष, साधुता, विनम्रता, विवेकशीलता आदि अनेक विशेषताएं हैं जो आज के इस वैज्ञानिक युग के भटके हुए इंसान को प्रभावित करके उसे मानव से महामानव बनाने की क्षमता रखती हैं । संतों और भक्तों ने अपनी पवित्र वाणियों में जनता की भाषा का प्रयोग करके उन्हें 'अपना अमर संदेश दिया है । जिन शाश्वत मूल्यों को इनवाणियों में व्यक्त किया गया है वे प्रत्येक देश, समाज और काल के लिए अपनी विशेष उपयुक्तता रखती हैं । रविदासजी की जीवन गाथा और उनकी अमृत वाणी भी जन-कल्याणी है । जन-कल्याण के लिए ही यह पुस्तक लिखी गई है ।

मैं न तो कोई विद्वान हूं और न अच्छा लेखक । ही, एक जन्मजात समाज सेवक जरूर हूं जिसका संबंध रविदास परिवार से है । मेरी समाज सेवा और रविदास में श्रद्धा एवं निष्ठा को देखकर ही 'नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया' ने मुझसे यह छोटी-सी पुस्तक श्री गुरु रविदास सभा, यू,के, के आग्रह पर लिखवाई है । इस पुस्तक को 'नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने छापने का निश्चय करके हमारे समाज की एक बहुत बड़ी सेवा की है जिसके लिए मैं अपने समाज की ओर से आभार प्रकट करता हूं । मुझे आशा है कि जिस श्रद्धा और भावना से प्रेरित होकर मैंने यह पुस्तक लिखी है, उसी भावना से इसे पाठक-वृद देखेंगे और जहां कहीं कोई भूल देखें, उसे ठीक करके मुझे सूचित करेंगे ताकि उसका सुधार कर सकूं ।

 

विषयनुक्रम

प्रस्तावना

1

रामानंद का भक्ति-आदोलन और गुरु रविदास

1

2

गुरु रविदास-जीवन

7

3

गुरु रविदास वाणी की विशेषताएं एवं विचारधारा

32

4

गुरु रविदासजी की भक्ति भावना तथा भक्ति साधना

38

5

गुरु रविदासजी की समाज को देन

45

6

रविदास वाणी

साखी भाग

49

पद भाग

56

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to गुरु रविदास: Guru Ravidas (Hindi | Books)

Sri Guru Granth Sahib (Set of 4 Vol.)
by Dr. Gopal Singh
Hardcover (Edition: 2005)
Allied Publishers Pvt. Limited
Item Code: NAG878
$95.00
Add to Cart
Buy Now
A Comparative Study: Ethical Perceptions of World Religions
Item Code: IDF459
$32.00
Add to Cart
Buy Now
Changiya Rukh : Against The Night (An Autobiography)
Deal 20% Off
Item Code: NAL066
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Historical Gurdwaras of Delhi
by M.K. Pal
Paperback (Edition: 2013)
Niyogi Books
Item Code: NAE926
$35.00
Add to Cart
Buy Now
Sikh Cultural Traditions. Customs Manners and Ceremonies
Deal 20% Off
Item Code: NAG055
$30.00$24.00
You save: $6.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Sikh Shrines in India
Item Code: IDG492
$22.50
Add to Cart
Buy Now
Bed Time Stories - 10 (Honoured Saints)
Deal 20% Off
Item Code: IDK616
$13.00$10.40
You save: $2.60 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Hundreds of Shells (From The Spiritual Sands Of Swami Satyamitranand Giri)
by Raj Supe
Paperback (Edition: 2011)
Celestial Books
Item Code: NAE047
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Famous Great Indian Saints
Deal 20% Off
by Shyam Dua
Paperback (Edition: 2008)
Tiny Tot Publications
Item Code: NAD778
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Churning of The Heart (Set of 3 Volumes)
Item Code: NAK853
$70.00
Add to Cart
Buy Now
Timeless Wisdom (Passages for Meditation from the World’s Saints and Sages)
by Eknath Easwaran
Paperback (Edition: 2009)
Jaico Publishing House
Item Code: IHL470
$23.50
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I have always been delighted with your excellent service and variety of items.
James, USA
I've been happy with prior purchases from this site!
Priya, USA
Thank you. You are providing an excellent and unique service.
Thiru, UK
Thank You very much for this wonderful opportunity for helping people to acquire the spiritual treasures of Hinduism at such an affordable price.
Ramakrishna, Australia
I really LOVE you! Wonderful selections, prices and service. Thank you!
Tina, USA
This is to inform you that the shipment of my order has arrived in perfect condition. The actual shipment took only less than two weeks, which is quite good seen the circumstances. I waited with my response until now since the Buddha statue was a present that I handed over just recently. The Medicine Buddha was meant for a lady who is active in the healing business and the statue was just the right thing for her. I downloaded the respective mantras and chants so that she can work with the benefits of the spiritual meanings of the statue and the mantras. She is really delighted and immediately fell in love with the beautiful statue. I am most grateful to you for having provided this wonderful work of art. We both have a strong relationship with Buddhism and know to appreciate the valuable spiritual power of this way of thinking. So thank you very much again and I am sure that I will come back again.
Bernd, Spain
You have the best selection of Hindu religous art and books and excellent service.i AM THANKFUL FOR BOTH.
Michael, USA
I am very happy with your service, and have now added a web page recommending you for those interested in Vedic astrology books: https://www.learnastrologyfree.com/vedicbooks.htm Many blessings to you.
Hank, USA
As usual I love your merchandise!!!
Anthea, USA
You have a fine selection of books on Hindu and Buddhist philosophy.
Walter, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India