Warning: include(domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 751

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address [email protected].

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindi > हिंदू धर्म > वेद > जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji with Lord Rama
Subscribe to our newsletter and discounts
जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji with Lord Rama
Pages from the book
जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji with Lord Rama
Look Inside the Book
Description

प्रथम संस्करणका निवेदन

जानकी मंगलमें (जैसा कि इसके नामसे ही स्पष्ट है) प्रात:स्मरणीय गोस्वामीजीने जगज्जननी आद्याशक्ति भगवती श्रीजानकीजी तथा परात्पर पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीरामके परम मङ्गलमय विवाहोत्सवका बड़े ही मधुर शब्दोंमें वर्णन किया हैजनकपुरमें स्वयंवरकी तैयारीसे आरम्भ करके विश्वामित्रके अयोध्या जाकर श्रीराम  लक्ष्मणको यज्ञ रक्षाके ब्याजसे अपने साथ ले आने, यज्ञ रक्षाके अनन्तर धनुष यज्ञ दिखानेके बहाने उन्हें जनकपुर ले जाने, रंग  भूमिमें पधारकर श्रीरामके धनुष तोड्ने तथा श्रीजनकराजतनयाके उन्हें वरमाला पहनाने, लग्न पत्रिका तथा तिलककी सामग्री लेकर जनकपुरोधा महर्षि शतानन्दजीके अयोध्या जाने, महाराज दशरथके बरात लेकर जनकपुर जाने, विवाह संस्कारसम्पत्र होनेके अनन्तर बरातके बिदा होने, मार्गमें भृगुनन्दन परशुरामजीसे भेंट होने तथा अन्तमें अयोध्या पहुँचनेपर वहाँ आनन्द मनाये जाने आदि प्रसङो्ंका संक्षेपमें बड़ा ही सरस एवं सजीव वर्णन किया गया है; जो प्राय: रामचरितमानससे मिलता जुलता ही हैकहीं कहीं तो रामचरितमानसके शब्द ही ज्यों के त्यों दुहराये गये है

इस छोटे से अन्यका सरल भावानुवाद कई वर्ष पूर्व कवितावलीके टीकाकार हमारे पूर्वपरिचित स्वर्गीय श्रीइन्द्रदेवनारायणसिंहजीने किया था, जिसका हमारे अपने श्रीमुनिलालजी (वर्तमान स्वामी श्रीसनातनदेव  जी) ने बड़े परिश्रम एवं प्रेमसे संशोधन भी कर दिया थापरंतु इच्छा रहते भी इतने लम्बे कालतक उसे छापनेका सुयोग नहीं उपस्थित हुआश्रीसीतारामजीकी कृपासे वह स्वर्ण अवसर अब प्राप्त हुआ है और पूज्य गोस्वामीजीकी यह मंगलमयी कृति सरल अनुवादसहित श्रीरामभक्तोंकी सेवामें सादर प्रस्तुत की जा रही हैअनुवाद कैसा हुआ है, इसकी परख तो विज्ञ पाठक ही कर सकेंगेपाठ अथवा अर्थमें जहाँ कहीं भ्रमवश तथा दृष्टिदोषसे भूलें रह गयी हों, उनकी ओर यदि कोई महानुभाव हमारा ध्यान आकृष्ट करनेकी कृपा करेंगे तो हम उनके कृतज्ञ होंगे तथा अगले संस्करणमें उन भूलोंको सुधारनेकी चेष्टा करेंगेश्रीसीतारामजीके इस परम पावन चरित्रके अनुशीलनसे जनताका अशेष मंगल होगा इसी आशासे उनकी यह वस्तु उन्हींके पाद पद्योंमें निवेदित है

 

Sample Page

 

जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji with Lord Rama

Item Code:
GPA142
Cover:
Paperback
Edition:
2013
ISBN:
9788129305039
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
48
Other Details:
Weight of the Book: 40 gms
Price:
$3.00   Shipping Free
Look Inside the Book
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji with Lord Rama

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 10677 times since 17th Dec, 2016

प्रथम संस्करणका निवेदन

जानकी मंगलमें (जैसा कि इसके नामसे ही स्पष्ट है) प्रात:स्मरणीय गोस्वामीजीने जगज्जननी आद्याशक्ति भगवती श्रीजानकीजी तथा परात्पर पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीरामके परम मङ्गलमय विवाहोत्सवका बड़े ही मधुर शब्दोंमें वर्णन किया हैजनकपुरमें स्वयंवरकी तैयारीसे आरम्भ करके विश्वामित्रके अयोध्या जाकर श्रीराम  लक्ष्मणको यज्ञ रक्षाके ब्याजसे अपने साथ ले आने, यज्ञ रक्षाके अनन्तर धनुष यज्ञ दिखानेके बहाने उन्हें जनकपुर ले जाने, रंग  भूमिमें पधारकर श्रीरामके धनुष तोड्ने तथा श्रीजनकराजतनयाके उन्हें वरमाला पहनाने, लग्न पत्रिका तथा तिलककी सामग्री लेकर जनकपुरोधा महर्षि शतानन्दजीके अयोध्या जाने, महाराज दशरथके बरात लेकर जनकपुर जाने, विवाह संस्कारसम्पत्र होनेके अनन्तर बरातके बिदा होने, मार्गमें भृगुनन्दन परशुरामजीसे भेंट होने तथा अन्तमें अयोध्या पहुँचनेपर वहाँ आनन्द मनाये जाने आदि प्रसङो्ंका संक्षेपमें बड़ा ही सरस एवं सजीव वर्णन किया गया है; जो प्राय: रामचरितमानससे मिलता जुलता ही हैकहीं कहीं तो रामचरितमानसके शब्द ही ज्यों के त्यों दुहराये गये है

इस छोटे से अन्यका सरल भावानुवाद कई वर्ष पूर्व कवितावलीके टीकाकार हमारे पूर्वपरिचित स्वर्गीय श्रीइन्द्रदेवनारायणसिंहजीने किया था, जिसका हमारे अपने श्रीमुनिलालजी (वर्तमान स्वामी श्रीसनातनदेव  जी) ने बड़े परिश्रम एवं प्रेमसे संशोधन भी कर दिया थापरंतु इच्छा रहते भी इतने लम्बे कालतक उसे छापनेका सुयोग नहीं उपस्थित हुआश्रीसीतारामजीकी कृपासे वह स्वर्ण अवसर अब प्राप्त हुआ है और पूज्य गोस्वामीजीकी यह मंगलमयी कृति सरल अनुवादसहित श्रीरामभक्तोंकी सेवामें सादर प्रस्तुत की जा रही हैअनुवाद कैसा हुआ है, इसकी परख तो विज्ञ पाठक ही कर सकेंगेपाठ अथवा अर्थमें जहाँ कहीं भ्रमवश तथा दृष्टिदोषसे भूलें रह गयी हों, उनकी ओर यदि कोई महानुभाव हमारा ध्यान आकृष्ट करनेकी कृपा करेंगे तो हम उनके कृतज्ञ होंगे तथा अगले संस्करणमें उन भूलोंको सुधारनेकी चेष्टा करेंगेश्रीसीतारामजीके इस परम पावन चरित्रके अनुशीलनसे जनताका अशेष मंगल होगा इसी आशासे उनकी यह वस्तु उन्हींके पाद पद्योंमें निवेदित है

 

Sample Page

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to जानकी मंगल: Janaki Mangal - The Marriage of Sita Ji... (Hindi | Books)

In Search of Sita: Revisiting Mythology
by Malashri Lal & Namita Gokhale
Paperback (Edition: 2009)
Penguin
Item Code: IHF068
$23.00
Add to Cart
Buy Now
Sita's Sister
by Kavita Kane
Paperback (Edition: 2014)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: NAL579
$18.00
Add to Cart
Buy Now
Sita (The Image of Chastity)
by Shantilal Nagar
Hardcover (Edition: 2006)
B.R. Publishing Corporation
Item Code: IDK512
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Sita: Daughter of The Earth (Comic)
Item Code: NAF366
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Episodes from Srimad Bhagavatam (A Rare Book)
Item Code: NAG162
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Hindu Temples: What Happened to Them (Set of 2 Volumes)
by Sita Ram Goel
Paperback (Edition: 2015)
Voice of India, New Delhi
Item Code: NAM490
$65.00
Add to Cart
Buy Now
How I Became a Hindu (Reprinted with a Postscript)
by Sita Ram Goel
Paperback (Edition: 2007)
Voice of India, New Delhi
Item Code: NAM384
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Defence of Hindu Society
by Sita Ram Goel
Paperback (Edition: 2014)
Voice of India, New Delhi
Item Code: NAM192
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Tiruppavai by Andal (With Detailed Commentary in English)
Item Code: NAK057
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Saivism Under The Imperial Colas (As Revealed Through Their Monuments)
by Dr. Sita Narasimhan
Hardcover (Edition: 2006)
Sharada Publishing House
Item Code: NAL551
$55.00
Add to Cart
Buy Now
HANUMAN: IN VALMIKI'S RAMAYANA
Deal 20% Off
by IRMA SCHOTSMAN
Hardcover (Edition: 2002)
Nag Publisher
Item Code: IDG192
$45.00$36.00
You save: $9.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
Madhava Kandali Ramayana  in Two Volumes
Item Code: NAC440
$55.00
Add to Cart
Buy Now
Sundarakanda (A Beautiful Story of Hanuman’s Success)
Item Code: NAJ086
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I am very happy with your service, and have now added a web page recommending you for those interested in Vedic astrology books: https://www.learnastrologyfree.com/vedicbooks.htm Many blessings to you.
Hank, USA
As usual I love your merchandise!!!
Anthea, USA
You have a fine selection of books on Hindu and Buddhist philosophy.
Walter, USA
I am so very grateful for the many outstanding and interesting books you have on offer.
Hans-Krishna, Canada
Appreciate your interest in selling the Vedantic books, including some rare books. Thanks for your service.
Dr. Swaminathan, USA
I received my order today, very happy with the purchase and thank you very much for the lord shiva greetings card.
Rajamani, USA
I have a couple of your statues in your work is really beautiful! Your selection of books and really everything else is just outstanding! Namaste, and many blessings.
Kimberly
Thank you once again for serving life.
Gil, USa
Beautiful work on the Ganesha statue I ordered. Prompt delivery. I would order from them again and recommend them.
Jeff Susman
Awesome books collection. lots of knowledge available on this website
Pankaj, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India