Warning: include(domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3): failed to open stream: No such file or directory in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 921

Warning: include(): Failed opening 'domaintitles/domaintitle_cdn.exoticindia.php3' for inclusion (include_path='.:/usr/lib/php:/usr/local/lib/php') in /home/exotic/newexotic/header.php3 on line 921

Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address [email protected].

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
Subscribe to our newsletter and discounts
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
Description

लेखक परिचय

 

आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन काल में ही मिथक पुरुष बन गए थे। हिन्दी में 'आकाशधर्मा और 'मिथक' इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था।

उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षेां तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्यवान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं।

उनका जीवन संघर्ष विस्थापित होत रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन यात्रा के बारे में लिखना जितना जरूरी है उससे ज्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निय और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्त्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य मंडली, लेखक की मित्र अनायास पुस्तक में आ गई है।

 

अनुक्रम

भूमिका

9 से 28

नाम रूप पंडितजी के गाँव में, पुण्य स्मरण यह किताब

बचपन, बसरिकापुर और काशी

अथेयं विश्वभारती

शान्तिनिकेतन का प्रभाव

हिन्दी भवन

विश्वभारती पत्रिका

शान्तिनिकेतन का जीवन

मातृ संस्था का निमंत्रण: मन का बन्धन

काशी विश्वविद्यालय:देखी तुम्हरी कासी

133 से 236

अध्यापक मंडल

सतीर्थ मंडल

'संदेश रासक' प्रकरण

बना रहे बनारस

हिन्दी विभागाध्यक्ष: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

काशी नागरी प्रचारिणी सभा

साहित्य अकादमी

द्विवेदी जी परिवार में

आकाशधर्मा का विस्थापन

237 से 254

गाढ़े का साथी:पंजाब

255 से 282

काशी विश्वविद्यालय का एक और निमंत्रण

फिर बैतलवा उसी डार पर

283 से 318

हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, उत्तर प्रदेश

व्योमकेश दरवेश चलो अब

319 से 344

सूर्य अस्त हो गया!

हजारीप्रसाद द्विवेदी का निधन

हजारीप्रसाद द्विवेदी की आत्म स्वीकृतियाँ

रचना और रचनाकार

345 से 464

रजनी दिन नित्य चला ही किया

ज्ञान की सर्जना

परम्परा एवं आधुनिकता

'मैं हूँ स्वयं निज प्रतिवाद'

इतिहास राजनीति

भारतीय सामूहिक चित्त का निर्णय

 

 

 

व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)

Deal 20% Off
Item Code:
HAA144
Cover:
Paperback
Edition:
2017
ISBN:
9788126722020
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
464
Other Details:
Weight of the Book:
Price:
$21.00
Discounted:
$16.80   Shipping Free
You Save:
$4.20 (20%)
Be the first to rate this product
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
व्योमकेश दरवेश (आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्या स्मरण) - Vyomkesh Darvesh (Biography of Hazari Prasad Dwivedi)
From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 10002 times since 21st Jul, 2019

लेखक परिचय

 

आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन काल में ही मिथक पुरुष बन गए थे। हिन्दी में 'आकाशधर्मा और 'मिथक' इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था।

उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षेां तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्यवान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं।

उनका जीवन संघर्ष विस्थापित होत रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन यात्रा के बारे में लिखना जितना जरूरी है उससे ज्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निय और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्त्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य मंडली, लेखक की मित्र अनायास पुस्तक में आ गई है।

 

अनुक्रम

भूमिका

9 से 28

नाम रूप पंडितजी के गाँव में, पुण्य स्मरण यह किताब

बचपन, बसरिकापुर और काशी

अथेयं विश्वभारती

शान्तिनिकेतन का प्रभाव

हिन्दी भवन

विश्वभारती पत्रिका

शान्तिनिकेतन का जीवन

मातृ संस्था का निमंत्रण: मन का बन्धन

काशी विश्वविद्यालय:देखी तुम्हरी कासी

133 से 236

अध्यापक मंडल

सतीर्थ मंडल

'संदेश रासक' प्रकरण

बना रहे बनारस

हिन्दी विभागाध्यक्ष: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

काशी नागरी प्रचारिणी सभा

साहित्य अकादमी

द्विवेदी जी परिवार में

आकाशधर्मा का विस्थापन

237 से 254

गाढ़े का साथी:पंजाब

255 से 282

काशी विश्वविद्यालय का एक और निमंत्रण

फिर बैतलवा उसी डार पर

283 से 318

हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, उत्तर प्रदेश

व्योमकेश दरवेश चलो अब

319 से 344

सूर्य अस्त हो गया!

हजारीप्रसाद द्विवेदी का निधन

हजारीप्रसाद द्विवेदी की आत्म स्वीकृतियाँ

रचना और रचनाकार

345 से 464

रजनी दिन नित्य चला ही किया

ज्ञान की सर्जना

परम्परा एवं आधुनिकता

'मैं हूँ स्वयं निज प्रतिवाद'

इतिहास राजनीति

भारतीय सामूहिक चित्त का निर्णय

 

 

 

Post a Comment
 
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to व्योमकेश दरवेश (आचार्य... (Language and Literature | Books)

The Cultural Heritage of India (Set of 9 Volumes)
Item Code: NAF605
$595.00
Add to Cart
Buy Now
Change and Continuity in Indian Sufism
Deal 20% Off
by Thomas Dahnhardt 
Hardcover (Edition: 2002)
D. K. Printworld Pvt. Ltd.
Item Code: IDD271
$36.00$28.80
You save: $7.20 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Complete Pancatantra: Sanskrit Text with English Translation
by Dr. Naveen Kumar Jha
Hardcover (Edition: 2016)
J.P. Publishing House
Item Code: NAL574
$47.00
Add to Cart
Buy Now
The Structure of Indian Mind
Item Code: IHL155
$29.00
Add to Cart
Buy Now
Famous Great Indian Authors and Poets
Deal 20% Off
by Shyam Dua
Paperback (Edition: 2007)
Tiny Tot Publications
Item Code: NAF095
$15.00$12.00
You save: $3.00 (20%)
Add to Cart
Buy Now
The Wandering Sufis (Qalandars and Their Path)
by Kumkum Srivastava
Hardcover (Edition: 2009)
Aryan Books International
Item Code: IDK971
$52.00
Add to Cart
Buy Now
Couplets from Kabir (Kabir Dohe)
Item Code: IDD884
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Kabir: The Weaver's Songs
by Vinay Dharwadker
Paperback (Edition: 2003)
Penguin Books India
Item Code: IHL372
$31.00
Add to Cart
Buy Now
Folk Tales of Bihar
by P. C. Roy Chaudhury
PAPERBACK (Edition: 2017)
Sahitya Akademi, Delhi
Item Code: NAR448
$16.00
Add to Cart
Buy Now
Popular Tales of Rajasthan
by L.N. Birla
Paperback (Edition: 2001)
Bharatiya Vidya Bhavan
Item Code: IHL615
$13.50
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Namaste! Thank you for your kind assistance! I would like to inform that your package arrived today and all is very well. I appreciate all your support and definitively will continue ordering form your company again in the near future!
Lizette, Puerto Rico
I just wanted to thank you again, mere dost, for shipping the Nataraj. We now have it in our home, thanks to you and Exotic India. We are most grateful. Bahut dhanyavad!
Drea and Kalinidi, Ireland
I am extremely very happy to see an Indian website providing arts, crafts and books from all over India and dispatching to all over the world ! Great work, keep it going. Looking forward to more and more purchase from you. Thank you for your service.
Vrunda
We have always enjoyed your products.
Elizabeth, USA
Thank you for the prompt delivery of the bowl, which I am very satisfied with.
Frans, the Netherlands
I have received my books and they are in perfect condition. You provide excellent service to your customers, DHL too, and I thank you for that. I recommended you to my friend who is the director of the Aurobindo bookstore.
Mr. Forget from Montreal
Thank you so much. Your service is amazing. 
Kiran, USA
I received the two books today from my order. The package was intact, and the books arrived in excellent condition. Thank you very much and hope you have a great day. Stay safe, stay healthy,
Smitha, USA
Over the years, I have purchased several statues, wooden, bronze and brass, from Exotic India. The artists have shown exquisite attention to details. These deities are truly awe-inspiring. I have been very pleased with the purchases.
Heramba, USA
The Green Tara that I ordered on 10/12 arrived today.  I am very pleased with it.
William USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2020 © Exotic India