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Books > Hindi > भोजन के द्वारा चिकित्सा द्वितीय: Healing Through Food
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भोजन के द्वारा चिकित्सा द्वितीय: Healing Through Food
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भोजन के द्वारा चिकित्सा द्वितीय: Healing Through Food
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Description

लेखक के विषय में

डॉ. गणेश नारायण चौहान(सैनी)

शिवा होम्यो विशारद, वक्ष-रोग विशेषज्ञ; एम.ए. साहित्यरत्न, धर्मालंकार ।

पद:होम्योपैथ, राजस्थान विश्वविद्यालय होम्योपैथिक क्लिनिक, जयपुर। व्यस्त चिकित्सक, रोगियों की भीड़ से घिरे हुए होम्योपैथिक चिकित्सा में लीन। चिकित्सा विषयक 4 पुस्तकों के लेखक।

अभिरुचि:होम्योपैथिक एवं भोजन विषयों का अध्ययन, चिन्तन-मनन एवं अनुभव द्वारा सत्यान्वेषण, लेखन, भाषण, टी. वी. और रेडियो वार्तायें; दैनिक अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में स्वास्थ्य- प्रश्नोत्तर. लेख-प्रकाशन, आध्यात्मिक तत्त्व चर्चा, परोपकारी कार्यो में रुचि । लोग शुद्ध, सात्विक भोजन एवं सस्ती सर्वसुलभ होम्योपैथिक चिकित्सा से निरोग ही, इस कर्मक्षेत्र में निरन्तर क्रियाशील।

विशेषताएँ:रोगियों की चिकित्सा करके स्वस्थ होने पर सुखानुभव; सरल,सस्ती चिकित्सा उपलब्ध कराना, पुराने, असाध्य रोगों की बिना चीरफाड़ चिकित्सा करना; पेट, कमर, वक्ष(Chest) रोगों का अयिक अनुभव, प्राय. होने वाले सभी रोगों, नये एवं जटिल रोगों की दीर्घकाल से चिकित्सा करते हुए गहन अनुभवी, दूर रहने वाले रोगियों की पत्र-व्यवहार द्वारा चिकित्सा एवं परामर्श । अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों को बताना एवं चिकित्सा में रुचि रखने वालों का मार्गदर्शन करना । भारत में जगह-जगह कैम्प लगवा कर चिकित्सा करना ।

लेखकीय

"भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-एक" पाठकों में अति लोकप्रिय रही । इसके प्रकाशन के बाद भी मैं अपने रुचिक विषय'भोजन के द्वारा चिकित्सा' पर निरन्तर श्रम करता रहा । भोजन सम्बन्धी उपलब्ध देश-विदेश के साहित्य,नये अनुसंधानों,चिकित्सकों और परोपकारी व्यक्ति जो पेशेवर चिकित्सक नहीं होते हुए भी रोगियों की सेवा अपने अनुभूत नुस्खों से करते है, इन सब साधनों से प्राप्त सामग्री संचय कर नित्य मैंने चिकित्सा कार्य में रोगियों पर प्रयोग करके इस सामग्री की उपयोगिता का मूल्यांकन करता रहा ।

लोगों का घरेलू चिकित्सा में विश्वास है । बीमार होने पर आरम्भिक चिकित्सा तो जिस व्यक्ति का जैसा ज्ञान होता है, उसके अनुसार सभी अपने परिवार में करते है । जैसे देर रात में, जब प्राय: चिकित्सालय बन्द हो गये ही, डॉक्टर भी सो रहे ही, परिवार में किसी को अचानक क़ै,तेज बुखार,कोई भी रोग हो जाये तो स्वयं ही बर्फ,लौंग,सौंठ आदि कोई घरेलू चीज का प्रयोग सते है और प्रात: होने तक प्राय: बीमार ठीक हो जाता है । इस प्रकार चिकित्सा भी हो जाती है औरतेज दुप्रभावी ओपधियों के सेवन से बच कर अपने शरीर को निर्मल और स्वस्थ रख लेते है। मैंने यह देखा कि वहाँ सैकड़ों रुपयों की दवाइयों से रोग ठीक नहीं हुआ, वहाँ सस्ती घरेलू खान-पान की चीजों से लाभ हो गया ।

जब मैंने अध्ययन, चिन्तन,मनन के बाद खान-पान की चीजों से हुए आशातीत लाभ को देखा, अनुभव किया तो अन्त:करण में व्याप्त परोपकारी भावनायें उदे्वलित हो उठीं और जनता के स्वास्थ्यलाभ की कामना की बलवती इच्छा से अत्यन्त व्यस्त रहते हुए भी दैनिक दिनचर्या में से नित्य किसी तरह घण्टा, आधा घण्टा बचा कर उत्साह से भोज्य पदार्थों में व्याप्त ओषधियों के गुण लेखनीबद्ध हो गये। फलस्वरूप'भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो के रूप में यह पुस्तक बन गई। नित्य खाने में आने वाला हमारा भोजन ही हमारी प्राथमिक ओषधि है । जो कुछ अनुभव, ज्ञान हुआ उसका दिग्दर्शन मात्र यह पुस्तक है । परमात्मा की कृपा का ही यह प्रसाद है कि मेरी बुद्धि का उपयोग इस रचना में लग गया । रोग-निवारण शक्ति तो हमारे शरीर में है, आवश्यकता है रोगी की जीवन-शक्ति (Vital Force)बढाने की और इस जीवन-शक्ति के बढ़ाने में भोजन का उपयोग बहुत सहायक होता है । अत: प्राय: सभी रोगों से ग्रस्त रोगियों को भोजन के दारा चिकित्सा सफलता के साथ दी जा सकती है । चिकित्सा इतनी महँगी हो गई है कि हर दीन दु:खी चिकित्सा नहीं करा सकता । इस पुस्तक को पद कर अपनी चिकित्सा अपने आप कर सकते है।

दबा की शीशी पर'विष (Posion)छपा होता है । दवाइयां कड़वी.तीखी भी होती है, रुचिकर नहीं होती। बच्चे रो-रो कर ही दवा लेते है। यही नहीं दवा की गन्ध भी सहन नहीं होती। इन सब दोषों को दूरकरने के लिए "सुगन्ध चिकित्सा"नया अध्याय का समावेश किया है। घिर के स्थान पर स्वादिष्ट भोज्य पदाथों से अमृतमयी भोजन के द्वारा चिकित्सा शाश्वत उपलब्धि है। इसमें प्राय: सभी पाठों में नवीन सामग्री बढ़ाई है। इससे पुस्तक की उपयोगिता बढ़ गई है।

पुस्तक की माँग निरन्तर रहते हुए भी कुछ वर्ष पूर्व यह पुस्तक नहीं छप सकी । पूर्व प्रकाशक राजस्थान होम्यो स्टोर्स, ढढ्ढ़ा मार्केट, जौहरी बाजार, जयपुर प्रेस की असुविधाओं से नहीं छाप सके। अब 1998 में प्रकाशित यह संस्करण नये प्रकाशक एवं स्वास्थ्य-जगत को बहुमूल्य उपयोगी साहित्य देने वाले इण्डिया बुक हाउस, जयपुर द्वारा सुन्दर, सुसज्जित कलेवर में आपके हाथों में पहुँच रही है।

'भोजन के द्वारा चिकित्सा' पहले से ही प्रकाशित है। यह पुस्तक''भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो'' उसी के समान होते हुए भी पूर्ण विवेचन नया है, पुनर्आवृत्त्ति बिल्कुल नहीं है।' भोजन के द्वारा चिकित्सा' प्रकाशित होने के बाद नवीन सामग्री इतनी एकत्रित हो गई कि इसी का नाम' भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो'' रखा गया।

आशा है यह पुस्तक रोगी को आराम देने में सहायक होगी। सभी चिकित्सा पद्धतियों में, लगे चिकित्सकों के लिए भी सहायक होगी।

इस पुस्तक के विषय का सम्बन्ध हर व्यक्ति से है । यदि स्कूल और कॉलेजों के पुस्तकालयों में इस पुस्तक को रखा गया तो हमारी नव-पीढ़ी का स्वास्थ्य उत्तम होगा, जिससे राष्ट्र सुदृढ़ होगा । इस पुस्तक के प्रचार, प्रसार और ग्राह्यता में मिलने वाला आपका सहयोग मेरी शक्ति को द्वि-गुणित करता रहेगा और ऐसी रचनायें समाज को देता रहूँगा। परमात्मा की कृपा से इस पुस्तक को लाखों की संख्या में लोग पढ़ें। मेरे जीवन का उपयोग पाठकों की सेवा में लगा रहे, यही मेरी कामना है।

मैं मेरे सभी सहयोगियों, ग्रन्थकारों जिनसे सहायता ली है, प्रकाशक महोदय, जिस किसी से जो कुछ सहयोग और सहायता मिली है, सबका आभारी हूँ।

 

विषय-सूची

1

अखरोट

34

2

अगरबत्ती

103

3

अच्छी नींद के लिए जरूरी बातें

119

4

अजवाइन

52

5

अदरक

53

6

अनन्नास

7

7

अनार

7

8

अफीम

35

9

अमृत भोज

106

10

अमरूद

8

11

अरहर

31

12

असगंध

34

13

असाध्य रोगियों का उपचार

121

14

आकड़ा

64

15

आम

4

16

आलू

14

17

आँवला

5

18

इमली

8

19

इलायची

57

20

उपवास

128

21

एड़ियाँ

97

22

एरीबायोटिक्स

107

23

एरण्ड

34

24

अगर

4

25

अण्डों का सेवन हानिकारक

118

26

क्रोध से पाचन क्रिया विकृत

126

27

कच्ची सब्जियां और अंकुरित अत्र

110

28

कपूर

87

29

कर्मफल

127

30

करोंदा

24

31

कटिदार थूहर

65

32

काफी

98

33

कालीमिर्च

45

34

केन्सर

118

35

केला

3

36

केसर

43

37

खरबूजा

13

38

खीरा

14

39

खस

103

40

गन्ना

35

41

गर्मी के मौसम में दिनचर्या

118

42

ग्लिसरीन

86

43

गाजर

13

44

गुड़

35

45

गुलाब

102

46

गेहूँ

27

47

थी

79

48

घंटा-ध्वनि

124

49

घूमना

122

50

चना

31

51

चन्दन का तेल

101

52

चमेली

104

53

चयापचय

125

54

चाय

98

55

चावल

26

56

चिकित्सक

123

57

चिरोंजी

58

58

चीनी

35

59

चुकन्दर

13

60

चेहरे पर झुर्रियां

94

61

चेहरे पर दाग-पने

90

62

छाछ

78

63

छुहारा

42

64

जर्दा खाने वालों

111

65

जामुन

9

66

जायफल

43

67

जीरा

44

68

जौ

27

69

टमाटर

12

70

त्वचा का सौन्दर्य

96

71

तरबूज

13

72

तालमखाना

58

73

तिल

32

74

तुलसी

81

75

तेजपात

59

76

दर्द-निवारक ओषधियाँ

108

77

दही

76

78

दीर्घजीवी होने के उपाय

119

79

दूध

73

80

दौड़ना

122

81

धतूरा

65

82

धनिया

47

83

घूम्रपान

109

84

नमक

49

85

नागकेशर

59

86

नारियल

10

87

नारंगी

2

88

नींद

119

89

नींद में खर्राटे

119

90

नीबू

1

91

नीम

61

92

नेत्रों के लिए आराम

88

93

नेत्रों के लिए भोजन

88

94

प्याज

14

95

पतासे

35

96

पपीता

10

97

परवल

14

98

पान

66

99

पानी

68

100

पिस्ता

43

101

पीपल

67

102

पीपल वृक्ष

68

103

पेठा

11

104

पोदीना

47

105

फालसा

9

106

फिटकरी

37

107

फिनाइल

86

108

बबुआ

24

109

बर्फ

71

110

बाजरा

28

111

बाल

97

112

वील

11

113

बेर

11

114

बैगन

24

115

भाप-स्नान

89

116

भूख

122

117

मक्का

32

118

मक्खन

80

119

मकड़ी का जाला

87

120

मसूर

31

121

महावीर वाणी

126

122

माजूफल

43

123

मांसाहार

112

124

मानसिक भोजन

124

125

मालिश

72

126

मिट्टी का तेल

86

127

मिश्री

36

128

मुख-सौन्दर्य

89

129

मुनक्का

5

130

मुलहठी

30

131

मूँग

31

132

मूँगफली

26

133

मूली

22

134

मेथी

25

135

मेहँदी

99

136

मोगरा, मोतिया

104

137

मोच का तेल

33

138

मोटापा

107

139

मोतियाबिंद

88

140

मौसमी

3

141

राई

59

142

रेशेदार भोजन

105

143

लहसुन

17

144

लाल मिर्च

46

145

लौकी

23

146

लौंग

38

147

विशेष भोजन

104

148

वैसलीन

86

149

शक्कर

36

150

शकरकन्दी

26

151

शहतूत

9

152

शहद

84

153

शासीरिक सौन्दर्य

95

154

शाकाहार

112

155

शाकवालेपर्याप्त/अपर्याप्त आहार

114

156

शिशुओं का पौष्टिक भोजन

119

157

शंख

123

158

स्प्रिट

86

159

सब्ज मोतियाबिंद (ग्लूकोमा)

89

160

स्वस्थ रहने के लिये आवश्यक

121

161

स्वस्थ सन्तान

120

162

सत्यानाशी

65

163

सफेद गुलाब

103

164

सरसों का तेल

32

165

साबूदाना

111

166

सिंघाड़ा

24

167

सिरस

59

168

सुगंधित चिकित्सा

100

169

सुगंधों से याददाश्त तेज

100

170

सुपारी

67

171

सुहागा

87

172

सेम

26

173

सेव

4

174

सोडा

86

175

सोयाबीन

27

176

सौंफ

38

177

हर्र (हरीत की)

80

178

हरी मिर्च

46

179

हल्दी

39

180

हाथों का खुरदरापन

94

181

हींग

41

182

त्रिफला

81

 

भोजन के द्वारा चिकित्सा द्वितीय: Healing Through Food

Item Code:
NZA888
Cover:
Paperback
Edition:
2014
Publisher:
ISBN:
9788186098523
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
151
Other Details:
Weight of the Book: 220gms
Price:
$10.00   Shipping Free
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भोजन के द्वारा चिकित्सा द्वितीय: Healing Through Food

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लेखक के विषय में

डॉ. गणेश नारायण चौहान(सैनी)

शिवा होम्यो विशारद, वक्ष-रोग विशेषज्ञ; एम.ए. साहित्यरत्न, धर्मालंकार ।

पद:होम्योपैथ, राजस्थान विश्वविद्यालय होम्योपैथिक क्लिनिक, जयपुर। व्यस्त चिकित्सक, रोगियों की भीड़ से घिरे हुए होम्योपैथिक चिकित्सा में लीन। चिकित्सा विषयक 4 पुस्तकों के लेखक।

अभिरुचि:होम्योपैथिक एवं भोजन विषयों का अध्ययन, चिन्तन-मनन एवं अनुभव द्वारा सत्यान्वेषण, लेखन, भाषण, टी. वी. और रेडियो वार्तायें; दैनिक अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में स्वास्थ्य- प्रश्नोत्तर. लेख-प्रकाशन, आध्यात्मिक तत्त्व चर्चा, परोपकारी कार्यो में रुचि । लोग शुद्ध, सात्विक भोजन एवं सस्ती सर्वसुलभ होम्योपैथिक चिकित्सा से निरोग ही, इस कर्मक्षेत्र में निरन्तर क्रियाशील।

विशेषताएँ:रोगियों की चिकित्सा करके स्वस्थ होने पर सुखानुभव; सरल,सस्ती चिकित्सा उपलब्ध कराना, पुराने, असाध्य रोगों की बिना चीरफाड़ चिकित्सा करना; पेट, कमर, वक्ष(Chest) रोगों का अयिक अनुभव, प्राय. होने वाले सभी रोगों, नये एवं जटिल रोगों की दीर्घकाल से चिकित्सा करते हुए गहन अनुभवी, दूर रहने वाले रोगियों की पत्र-व्यवहार द्वारा चिकित्सा एवं परामर्श । अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों को बताना एवं चिकित्सा में रुचि रखने वालों का मार्गदर्शन करना । भारत में जगह-जगह कैम्प लगवा कर चिकित्सा करना ।

लेखकीय

"भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-एक" पाठकों में अति लोकप्रिय रही । इसके प्रकाशन के बाद भी मैं अपने रुचिक विषय'भोजन के द्वारा चिकित्सा' पर निरन्तर श्रम करता रहा । भोजन सम्बन्धी उपलब्ध देश-विदेश के साहित्य,नये अनुसंधानों,चिकित्सकों और परोपकारी व्यक्ति जो पेशेवर चिकित्सक नहीं होते हुए भी रोगियों की सेवा अपने अनुभूत नुस्खों से करते है, इन सब साधनों से प्राप्त सामग्री संचय कर नित्य मैंने चिकित्सा कार्य में रोगियों पर प्रयोग करके इस सामग्री की उपयोगिता का मूल्यांकन करता रहा ।

लोगों का घरेलू चिकित्सा में विश्वास है । बीमार होने पर आरम्भिक चिकित्सा तो जिस व्यक्ति का जैसा ज्ञान होता है, उसके अनुसार सभी अपने परिवार में करते है । जैसे देर रात में, जब प्राय: चिकित्सालय बन्द हो गये ही, डॉक्टर भी सो रहे ही, परिवार में किसी को अचानक क़ै,तेज बुखार,कोई भी रोग हो जाये तो स्वयं ही बर्फ,लौंग,सौंठ आदि कोई घरेलू चीज का प्रयोग सते है और प्रात: होने तक प्राय: बीमार ठीक हो जाता है । इस प्रकार चिकित्सा भी हो जाती है औरतेज दुप्रभावी ओपधियों के सेवन से बच कर अपने शरीर को निर्मल और स्वस्थ रख लेते है। मैंने यह देखा कि वहाँ सैकड़ों रुपयों की दवाइयों से रोग ठीक नहीं हुआ, वहाँ सस्ती घरेलू खान-पान की चीजों से लाभ हो गया ।

जब मैंने अध्ययन, चिन्तन,मनन के बाद खान-पान की चीजों से हुए आशातीत लाभ को देखा, अनुभव किया तो अन्त:करण में व्याप्त परोपकारी भावनायें उदे्वलित हो उठीं और जनता के स्वास्थ्यलाभ की कामना की बलवती इच्छा से अत्यन्त व्यस्त रहते हुए भी दैनिक दिनचर्या में से नित्य किसी तरह घण्टा, आधा घण्टा बचा कर उत्साह से भोज्य पदार्थों में व्याप्त ओषधियों के गुण लेखनीबद्ध हो गये। फलस्वरूप'भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो के रूप में यह पुस्तक बन गई। नित्य खाने में आने वाला हमारा भोजन ही हमारी प्राथमिक ओषधि है । जो कुछ अनुभव, ज्ञान हुआ उसका दिग्दर्शन मात्र यह पुस्तक है । परमात्मा की कृपा का ही यह प्रसाद है कि मेरी बुद्धि का उपयोग इस रचना में लग गया । रोग-निवारण शक्ति तो हमारे शरीर में है, आवश्यकता है रोगी की जीवन-शक्ति (Vital Force)बढाने की और इस जीवन-शक्ति के बढ़ाने में भोजन का उपयोग बहुत सहायक होता है । अत: प्राय: सभी रोगों से ग्रस्त रोगियों को भोजन के दारा चिकित्सा सफलता के साथ दी जा सकती है । चिकित्सा इतनी महँगी हो गई है कि हर दीन दु:खी चिकित्सा नहीं करा सकता । इस पुस्तक को पद कर अपनी चिकित्सा अपने आप कर सकते है।

दबा की शीशी पर'विष (Posion)छपा होता है । दवाइयां कड़वी.तीखी भी होती है, रुचिकर नहीं होती। बच्चे रो-रो कर ही दवा लेते है। यही नहीं दवा की गन्ध भी सहन नहीं होती। इन सब दोषों को दूरकरने के लिए "सुगन्ध चिकित्सा"नया अध्याय का समावेश किया है। घिर के स्थान पर स्वादिष्ट भोज्य पदाथों से अमृतमयी भोजन के द्वारा चिकित्सा शाश्वत उपलब्धि है। इसमें प्राय: सभी पाठों में नवीन सामग्री बढ़ाई है। इससे पुस्तक की उपयोगिता बढ़ गई है।

पुस्तक की माँग निरन्तर रहते हुए भी कुछ वर्ष पूर्व यह पुस्तक नहीं छप सकी । पूर्व प्रकाशक राजस्थान होम्यो स्टोर्स, ढढ्ढ़ा मार्केट, जौहरी बाजार, जयपुर प्रेस की असुविधाओं से नहीं छाप सके। अब 1998 में प्रकाशित यह संस्करण नये प्रकाशक एवं स्वास्थ्य-जगत को बहुमूल्य उपयोगी साहित्य देने वाले इण्डिया बुक हाउस, जयपुर द्वारा सुन्दर, सुसज्जित कलेवर में आपके हाथों में पहुँच रही है।

'भोजन के द्वारा चिकित्सा' पहले से ही प्रकाशित है। यह पुस्तक''भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो'' उसी के समान होते हुए भी पूर्ण विवेचन नया है, पुनर्आवृत्त्ति बिल्कुल नहीं है।' भोजन के द्वारा चिकित्सा' प्रकाशित होने के बाद नवीन सामग्री इतनी एकत्रित हो गई कि इसी का नाम' भोजन के द्वारा चिकित्सा भाग-दो'' रखा गया।

आशा है यह पुस्तक रोगी को आराम देने में सहायक होगी। सभी चिकित्सा पद्धतियों में, लगे चिकित्सकों के लिए भी सहायक होगी।

इस पुस्तक के विषय का सम्बन्ध हर व्यक्ति से है । यदि स्कूल और कॉलेजों के पुस्तकालयों में इस पुस्तक को रखा गया तो हमारी नव-पीढ़ी का स्वास्थ्य उत्तम होगा, जिससे राष्ट्र सुदृढ़ होगा । इस पुस्तक के प्रचार, प्रसार और ग्राह्यता में मिलने वाला आपका सहयोग मेरी शक्ति को द्वि-गुणित करता रहेगा और ऐसी रचनायें समाज को देता रहूँगा। परमात्मा की कृपा से इस पुस्तक को लाखों की संख्या में लोग पढ़ें। मेरे जीवन का उपयोग पाठकों की सेवा में लगा रहे, यही मेरी कामना है।

मैं मेरे सभी सहयोगियों, ग्रन्थकारों जिनसे सहायता ली है, प्रकाशक महोदय, जिस किसी से जो कुछ सहयोग और सहायता मिली है, सबका आभारी हूँ।

 

विषय-सूची

1

अखरोट

34

2

अगरबत्ती

103

3

अच्छी नींद के लिए जरूरी बातें

119

4

अजवाइन

52

5

अदरक

53

6

अनन्नास

7

7

अनार

7

8

अफीम

35

9

अमृत भोज

106

10

अमरूद

8

11

अरहर

31

12

असगंध

34

13

असाध्य रोगियों का उपचार

121

14

आकड़ा

64

15

आम

4

16

आलू

14

17

आँवला

5

18

इमली

8

19

इलायची

57

20

उपवास

128

21

एड़ियाँ

97

22

एरीबायोटिक्स

107

23

एरण्ड

34

24

अगर

4

25

अण्डों का सेवन हानिकारक

118

26

क्रोध से पाचन क्रिया विकृत

126

27

कच्ची सब्जियां और अंकुरित अत्र

110

28

कपूर

87

29

कर्मफल

127

30

करोंदा

24

31

कटिदार थूहर

65

32

काफी

98

33

कालीमिर्च

45

34

केन्सर

118

35

केला

3

36

केसर

43

37

खरबूजा

13

38

खीरा

14

39

खस

103

40

गन्ना

35

41

गर्मी के मौसम में दिनचर्या

118

42

ग्लिसरीन

86

43

गाजर

13

44

गुड़

35

45

गुलाब

102

46

गेहूँ

27

47

थी

79

48

घंटा-ध्वनि

124

49

घूमना

122

50

चना

31

51

चन्दन का तेल

101

52

चमेली

104

53

चयापचय

125

54

चाय

98

55

चावल

26

56

चिकित्सक

123

57

चिरोंजी

58

58

चीनी

35

59

चुकन्दर

13

60

चेहरे पर झुर्रियां

94

61

चेहरे पर दाग-पने

90

62

छाछ

78

63

छुहारा

42

64

जर्दा खाने वालों

111

65

जामुन

9

66

जायफल

43

67

जीरा

44

68

जौ

27

69

टमाटर

12

70

त्वचा का सौन्दर्य

96

71

तरबूज

13

72

तालमखाना

58

73

तिल

32

74

तुलसी

81

75

तेजपात

59

76

दर्द-निवारक ओषधियाँ

108

77

दही

76

78

दीर्घजीवी होने के उपाय

119

79

दूध

73

80

दौड़ना

122

81

धतूरा

65

82

धनिया

47

83

घूम्रपान

109

84

नमक

49

85

नागकेशर

59

86

नारियल

10

87

नारंगी

2

88

नींद

119

89

नींद में खर्राटे

119

90

नीबू

1

91

नीम

61

92

नेत्रों के लिए आराम

88

93

नेत्रों के लिए भोजन

88

94

प्याज

14

95

पतासे

35

96

पपीता

10

97

परवल

14

98

पान

66

99

पानी

68

100

पिस्ता

43

101

पीपल

67

102

पीपल वृक्ष

68

103

पेठा

11

104

पोदीना

47

105

फालसा

9

106

फिटकरी

37

107

फिनाइल

86

108

बबुआ

24

109

बर्फ

71

110

बाजरा

28

111

बाल

97

112

वील

11

113

बेर

11

114

बैगन

24

115

भाप-स्नान

89

116

भूख

122

117

मक्का

32

118

मक्खन

80

119

मकड़ी का जाला

87

120

मसूर

31

121

महावीर वाणी

126

122

माजूफल

43

123

मांसाहार

112

124

मानसिक भोजन

124

125

मालिश

72

126

मिट्टी का तेल

86

127

मिश्री

36

128

मुख-सौन्दर्य

89

129

मुनक्का

5

130

मुलहठी

30

131

मूँग

31

132

मूँगफली

26

133

मूली

22

134

मेथी

25

135

मेहँदी

99

136

मोगरा, मोतिया

104

137

मोच का तेल

33

138

मोटापा

107

139

मोतियाबिंद

88

140

मौसमी

3

141

राई

59

142

रेशेदार भोजन

105

143

लहसुन

17

144

लाल मिर्च

46

145

लौकी

23

146

लौंग

38

147

विशेष भोजन

104

148

वैसलीन

86

149

शक्कर

36

150

शकरकन्दी

26

151

शहतूत

9

152

शहद

84

153

शासीरिक सौन्दर्य

95

154

शाकाहार

112

155

शाकवालेपर्याप्त/अपर्याप्त आहार

114

156

शिशुओं का पौष्टिक भोजन

119

157

शंख

123

158

स्प्रिट

86

159

सब्ज मोतियाबिंद (ग्लूकोमा)

89

160

स्वस्थ रहने के लिये आवश्यक

121

161

स्वस्थ सन्तान

120

162

सत्यानाशी

65

163

सफेद गुलाब

103

164

सरसों का तेल

32

165

साबूदाना

111

166

सिंघाड़ा

24

167

सिरस

59

168

सुगंधित चिकित्सा

100

169

सुगंधों से याददाश्त तेज

100

170

सुपारी

67

171

सुहागा

87

172

सेम

26

173

सेव

4

174

सोडा

86

175

सोयाबीन

27

176

सौंफ

38

177

हर्र (हरीत की)

80

178

हरी मिर्च

46

179

हल्दी

39

180

हाथों का खुरदरापन

94

181

हींग

41

182

त्रिफला

81

 

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